जम्मू और कश्मीर देश के उत्तरी क्षेत्र का राज्य है ये मुख्यतयाः हिमालय की पहाड़ियों पर बसा हुआ है और हिमाचल प्रदेश और पंजाब के साथ इसके दक्षिणी बॉर्डर पर है। जम्मू और कश्मीर के उत्तरी और पूर्वी सीमा पर चीन है और पश्चिम और उत्तरी पश्चिम सीमा पर पाकिस्तान शासित आज़ाद कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान है जो लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल के द्वारा अलग है. जम्मू और कश्मीर राज्य तीन क्षेत्रो में बटा हुआ है - जम्मू, कश्मीर वैली और लद्दाख। श्रीनगर गर्मियों की और जम्मू शीत ऋतू की राजधानी है. जम्मू और कश्मीर की जनसँख्या २०११ की मतगणना के मुताबिक लगभग १ करोड़ २६ लाख थी जिसमे ६८.३ % मुस्लिम, २८.४ % हिन्दू,१.९ %सिख,०.९% बौद्ध , 0.२८ % ईसाई है। मुख्यता जम्मू और कश्मीर के निवासियों में कश्मीरी,गुज्जर,पहाड़ी,बकरवाल,डोगरा और लद्दाखी है. कश्मीरी मुख्यता कश्मीर वेली और जम्मू की की चेनाब वेली में रहते है और कुछ कश्मीरी पीर पंजल के क्षेत्र में भी रहते है. पहाड़ी भाषा बोलने वाले पीर पंजल और उत्तरी कश्मीरी वेली में रहते है,गुज्जर और बकरवाल पीर पंजल क्षेत्र में रहते है,डोगरा काफी कुछ पंजाबियो जैसे होते है और जम्मू और उधमपुर जिले में रहते है,लद्दाख के दो जिले है लेह जहाँ पर ६८% बोद्ध और कारगिल जहाँ पर ९१% मुस्लिम जनसँख्या है,
कश्मीर वेली क्षेत्र में ९६.४ % मुस्लिम,२.४५% हिन्दू, ०.९८%सिख और ०.१७% अन्य निवासी है, शिया मुस्लिम राज्य की जनसँख्या के लगभग १४% है और मुख्यता बडगाम जिले के निवासी है.
जम्मू क्षेत्र में हिन्दू ६२.५५%,मुस्लिम ३३.४५%और सिख ३.३% है।
लद्दाख क्षेत्र में मुस्लिम ४६.४%,बौद्ध ३९.७%और हिन्दू १२.१% है
राजनितिक विश्लेषको के अनुसार कश्मीरी वेल्लय से ९९% कश्मीरी पण्डित पलायन कर चुके है
लेकिन अगर क्षेत्रफल के हिसाब से देखे तो बड़े दिलचस्प तथ्य सामने आते है, कश्मीर वेली राज्य का कुल १५.७३% क्षेत्र है और जनसंख्या कुल राज्य की ५४.९३% रहती है,जम्मू राज्य का कुल २५.९३% क्षेत्र है और जनसँख्या कुल राज्य की ४२.८९% रहती है और लद्दाख राज्य का कुल ५८.३३% क्षेत्र है और जनसंख्या कुल राज्य की सिर्फ २.१८% ही रहती है।
जम्मू और कश्मीर में बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ कश्मीरी,उर्दू,डोगरी,पंजाबी,पहाड़ी,बाल्टी ,लद्दाखी,गूजरी शीना और पश्तो है लेकिन राज्य की आधिकारिक भाषा पर्शियन स्क्रिप्ट में लिखी उर्दू है जबकि वहां के मुस्लिम मुख्यता कश्मीरी भाषा ( कुल जनसनसंख्या में से ५३%)का प्रयोग करते है।
जम्मू में लगभग ६७% डोगरा रहते है.
जम्मू और कश्मीर भारत का अकेला राज्य है जहाँ पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ आधिकारिक स्टेट ध्वज भी है.
जम्मू और कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल ६ वर्ष का है ,
Thursday, 18 August 2016
भारत की साक्षी मालिक ने फ्री स्टाइल कुश्ती के ५८ किलोग्राम वर्गमे किर्गिस्तान की आइसुलु टाइनेबेकोबा को हराकर रियो ओलिम्पिक में कांस्यपदक जीता, ३ मिनिट के पहले राउंड में साक्षी ० - ५ अंको से पीछे थी फिर दूसरे राउंड एक मिनिट के बाद उन्होंने ४ अंक हासिल कर स्कोर ४ - ५ कर दिया, और आखिरी मिनिट में पहले उन्होंने एक अंक हासिल कारस्कर ५ - ५ किया औरखिरि के दस सेकंड मे २ अंक हासिल कर ७ - ५ की निर्णायक बढ़त हासिल की जिसे प्रतिद्वंदी ने चैलेंज किया पर निर्णय साक्षी के पक्ष में जानेसे साक्षी को एक अंक और मिला जिससे वो ८ - ५ अंको से मैच जीत गयी और कांस्य पदक हासिल किया और १२५ करोड़ के देश को एक मैडल दिलवाकर शर्मिंदा होने से बचा लिया, साक्षी की जीत का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि उन्होंने एक ही दिन में पांच कुश्तिया लड़कर कांस्य पदक जीता है, साक्षी १२५ करोड़ देशवासियो को तुम पर गर्व है और हम तुम्हारे प्रति कृतज्ञ है
Saturday, 13 August 2016
¶मोबाइल से जुडी कई ऐसी बातें जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती लेकिन मुसीबत के वक्त यह मददगार साबित होती है ।
इमरजेंसी नंबर ---
दुनिया भर में मोबाइल का इमरजेंसी नंबर 112 है । अगर आप मोबाइल की कवरेज एरिया से बाहर हैं
तो 112 नंबर द्वारा आप उस क्षेत्र के नेटवर्क को सर्च कर लें। ख़ास बात यह है कि यह नंबर तब भी काम करता है जब आपका की पैड लौक हो।
जान अभी बाकी है---
मोबाइल जब बैटरी लो दिखाए और उस दौरान जरूरी कॉल करनी हो, ऐसे में आप *3370# डायल करें । आपका मोबाइल फिर से चालू हो जायेगा और आपका सेलफोन बैटरी में 50 प्रतिशत का इजाफा दिखायेगा। मोबाइल का यह रिजर्व दोबारा चार्ज हो जायेगा जब आप अगली बार मोबाइल को हमेशा की तरह चार्ज करेंगे।
मोबाइल चोरी होने पर---
मोबाइल फोन चोरी होने की स्थिति में सबसे पहले जरूरत होती है, फोन को निष्क्रिय करने की ताकि चोर उसका दुरुपयोग न कर सके । अपने फोन के सीरियल नंबर को चेक करने के लिए *#06# दबाएँ । इसे दबाते ही आपकी स्क्रीन पर 15 डिजिट का कोड नंबर आयेगा। इसे नोट कर लें और किसी सुरक्षित स्थान पर रखें। जब आपका फोन खो जाए उस दौरान अपने सर्विस प्रोवाइडर को ये कोड देंगे तो वह आपके हैण्ड सेट को ब्लोक कर देगा।
कार की चाभी खोने पर ---
अगर आपकी कार की रिमोट की लेस इंट्री है। और गलती से आपकी चाभी कार में बंद रह गयी है। और दूसरी चाभी घर पर है। तो आपका मोबाइल काम आ सकता है। घर में किसी व्यक्ति के मोबाइल फोन पर कॉल करें। घर में बैठे व्यक्ति से कहें कि वह अपने मोबाइल को होल्ड रखकर कार की चाभी के पास ले जाएँ और चाभी के अनलॉक बटन को दबाये। साथ ही आप अपने मोबाइल फोन को कार के दरवाजे के पास रखें....। दरवाजा खुल जायेगा।
है न विचित्र किन्तु सत्य......!!!
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एंड्राइड मोबाइल यूजर के काम के कोड
1. Phone Information, Usage and Battery – *#*#4636#*#*
2. IMEI Number – *#06#
3. Enter Service Menu On Newer Phones – *#0*#
4. Detailed Camera Information –*#*#34971539#*#*
5. Backup All Media Files –*#*#273282*255*663282*#*#*
6. Wireless LAN Test –*#*#232339#*#*
7. Enable Test Mode for Service –*#*#197328640#*#*
8. Back-light Test – *#*#0842#*#*
9. Test the Touchscreen –*#*#2664#*#*
10. Vibration Test –*#*#0842#*#*
11. FTA Software Version –*#*#1111#*#*
12. Complete Software and Hardware Info –*#12580*369#
13. Diagnostic Configuration –*#9090#
14. USB Logging Control –*#872564#
15. System Dump Mode –*#9900#
16. HSDPA/HSUPA Control Menu –*#301279#
17. View Phone Lock Status –*#7465625#
18. Reset the Data Partition to Factory State – *#*#7780#*#*
बड़े काम के कोड है इसलिए शेयर करे और दुसरो को भी बताये !
Wednesday, 27 July 2016
एक नया गेम आया है 'पोकेमॉन गो'
इस गेम को मोबाइल पर खेलने के लिए व्यक्ति को मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करना पड़ता है और गेम घर या कॉलेज या ऑफिस में बैठे बैठे नही खेला जा सकता इसके लिए उस व्यक्ति को मूवमेंट करना पड़ता है चाहे वो पैदल चले या बाइक या कार पर चले और जहाँ पर भी पोकेमॉन मोबाइल पर आ जाये उसी वक्त उसे कैच करना पड़ता है , इसका बड़ा ही स्पष्ट मतलब है कि या तो आदमी सड़क पर पैदल घूमे और गेम खेले जिसमे सड़क पर किसी वाहन या व्यक्ति से उसकी टक्कर की सम्भावना बहुत ज्यादा है, या फिर जैसा देखा गया है कि युवा मोबाइल को बाइक पर इस तरह रखकर बाइक चलते है कि वो अकेले ही इस गेम को बाइक चलाते चलाते खेल सके ऐसे हालात में बाइक के किसी दूसरे वाहन या किसी व्यक्ति से टक्कर की बहुत ही अधिक सम्भावना है, या फिर व्यक्ति कर में मोबाइल रखकर चलती कार में यह गेम खेलता है और सड़क पर दूसरे वाहनों या व्यक्तियों को टक्कर मार सकता है , जरा सोचिये कितना खतरनाक गेम है यह और देश के लाखो युवा इस तरह इस गेम के कारण खुद की और लाखो लोगो की जिंदगी खतरे में डाल रहे है , कई देशो ने तो इस पर प्रतिबंध लगा दिया है हमे भी सरकार से तत्काल मांग करनी चाहिए कि इस गेम पर प्रतिबंध लगे अन्यथा बहुत सारी दुर्घटनाये हो सकती है जिसमे हजारो व्यक्तियों की जान से खिलवाड़ हो सकता है , इसके साथ ही यह भी ध्यान रखने की बहुत जरुरत है कि कही आपके बच्चे तो यह गेम खेल रहे है या नही
Tuesday, 26 July 2016
यज्ञकर्म विज्ञान है कर्मकांड नहीं ।
वेदानुसार यज्ञ पाँच प्रकार के होते हैं-(१) ब्रह्मयज्ञ (२) देवयज्ञ (३) पितृयज्ञ (४) वैश्वदेव यज्ञ (५) अतिथि यज्ञ।
उक्त पाँच यज्ञों को पुराणों और अन्य ग्रंथों में विस्तार दिया गया है। वेदज्ञ सार को पकड़ते हैं विस्तार को नहीं। ।।ॐ विश्वानि देव सवितुर्दुरितानि परासुव। यद्भद्रं तन्नासुव ।।-यजु. भावार्थ : हे ईश्वर, हमारे सारे दुर्गुणों को दूर कर दो और जो अच्छे गुण, कर्म और स्वभाव हैं, वे हमें प्रदान करो।
'यज्ञ' का अर्थ आग में घी डालकर मंत्र पढ़ना नहीं होता। यज्ञ का अर्थ है- शुभ कर्म। श्रेष्ठ कर्म। सतकर्म। वेदसम्मत कर्म। सकारात्मक भाव से ईश्वर-प्रकृति तत्वों से किए गए आह्वान से जीवनकी प्रत्येक इच्छा पूरी होती है। माँगो, विश्वास करो और फिर पा लो। यही है यज्ञ का रहस्य।
(१) ब्रह्मयज्ञ : जड़ और प्राणी जगत से बढ़कर है मनुष्य। मनुष्य से बढ़कर है पितर, अर्थात माता-पिता और आचार्य। पितरों से बढ़कर हैं देव, अर्थात प्रकृति की पाँच शक्तियाँ और देव से बढ़कर है- ईश्वर और हमारे ऋषिगण। ईश्वर अर्थात ब्रह्म। यह ब्रह्म यज्ञ संपन्न होता है नित्य संध्या वंदन, स्वाध्याय तथा वेदपाठ करने से। इसके करने से ऋषियों का ऋण अर्थात 'ऋषि ऋण' चुकता होता है। इससे ब्रह्मचर्य आश्रम का जीवन भी पुष्ट होता है।
(२) देवयज्ञ : देवयज्ञ जो सत्संग तथा अग्निहोत्र कर्म से सम्पन्न होता है। इसके लिए वेदी मेंअग्नि जलाकर होम किया जाता है यही अग्निहोत्र यज्ञ है। यह भी संधिकाल में गायत्री छंद के साथ किया जाता है। इसे करने के नियम हैं। इससे 'देव ऋण' चुकता होता है।हवन करने को 'देवयज्ञ' कहा जाता है। हवन में सात पेड़ों की समिधाएँ (लकड़ियाँ) सबसे उपयुक्त होतीं हैं- आम, बड़, पीपल, ढाक, जाँटी, जामुन और शमी। हवन से शुद्धता और सकारात्मकता बढ़ती है। रोग और शोक मिटते हैं। इससे गृहस्थ जीवन पुष्ट होता है।
(३) पितृयज्ञ : सत्य और श्रद्धा से किए गए कर्म श्राद्ध और जिस कर्म से माता, पिता और आचार्यतृप्त हो वह तर्पण है। वेदानुसार यह श्राद्ध-तर्पण हमारे पूर्वजों, माता-पिता और आचार्य के प्रति सम्मान का भाव है। यह यज्ञ सम्पन्न होता है सन्तानोत्पत्ति से। इसी से 'पितृ ऋण' भी चुकताहोता है।
(४) वैश्वदेवयज्ञ : इसे भूत यज्ञ भी कहते हैं। पंच महाभूत से ही मानव शरीर है। सभी प्राणियोंतथा वृक्षों के प्रति करुणा और कर्त्तव्य समझना उन्हें अन्न-जल देना ही भूत यज्ञ या वैश्वदेव यज्ञ कहलाता है। अर्थात जो कुछ भी भोजन कक्ष में भोजनार्थ सिद्ध हो उसका कुछ अंश उसी अग्नि मेंहोम करें जिससे भोजन पकाया गया है। फिर कुछ अंश गाय, कुत्ते और कौवे को दें। ऐसा वेद-पुराण कहते हैं।
(५) अतिथि यज्ञ : अतिथि से अर्थ मेहमानों की सेवा करना उन्हें अन्न-जल देना। अपंग, महिला, विद्यार्थी, संन्यासी, चिकित्सक और धर्म के रक्षकों की सेवा-सहायता करना ही अतिथि यज्ञ है। इससे संन्यास आश्रम पुष्ट होता है। यही पुण्य है। यही सामाजिक कर्त्तव्य है।अंतत: उक्त पाँच यज्ञों के ही पुराणों में अनेक प्रकार और उप-प्रकार हो गए हैं जिनके अलग-अलग नाम हैं और जिन्हें करने की विधियाँ भी अलग-अलग हैं किंतु मुख्यत:यह पाँच यज्ञ ही माने गए हैं। इसके अलावा अग्निहोत्र, अश्वमेध, वाजपेय, सोमयज्ञ, राजसूय और अग्निचयन का वर्णण यजुर्वेद में मिलता है किंतु इन्हें आज जिस रूप में किया जाता है पूर्णत: अनुचित है। यहाँ लिखे हुए यज्ञ के अलावा अन्य किसी प्रकार के यज्ञ नहीं होते।
यज्ञकर्म को कर्त्तव्य व नियम के अंतर्गत माना गया है। यज्ञ एक वैज्ञानिक विद्या, जो १०० प्रतिशत कारगर है-यजन, पूजन, सम्मिलित विचार, वस्तुओं का वितरण। बदले के कार्य, आहुति, बलि, चढ़ावा, अर्पण आदि केअर्थ में भी यह शब्द उपयोग होता है।
यज्ञ, तप का ही एक रूप है। विशेष सिद्धियों या उद्देश्यों के लिए यज्ञ किए जाते हैं। चार वेदों में यजुर्वेद यज्ञ के मंत्रों से भरा है। इसके अलावा वेद आधारित अन्य शास्त्र, ब्राह्मण ग्रंथों और श्रोत सूत्रों में यज्ञ विधि का बहुत विस्तार से वर्णन हुआ है। वैदिक कालिन कार्यों एवं विधानों में यज्ञ का प्रधान धार्मिक कार्य माना गया है।वैज्ञानिक विद्या: यह इस संसार तथा स्वर्ग दोनों में दृश्य तथा अदृश्य पर, चेतन तथा अचेतन वस्तुओं पर अधिकार पाने का प्रमाणिक मार्ग या साधन है।
यज्ञ एक वैज्ञानिक विद्या है जो १००प्रतिशत कारगर एवं प्रामाणिक है। यज्ञ को पूरी तरह शास्त्र सम्मत एवं विधिविधान से करने पर इसके अद्भुत परिणाम प्राप्त होते हैं। यज्ञ से आसपास का वातावरण शुद्ध, पवित्र एवं दिव्य ऊर्जासे संपन्न होता है। आसपास के वातावरण में विभिन्न प्रकार की बीमारियों के कीटाणु यज्ञ की धूम और मंत्रों की ध्वनि तरंगों से नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं पर्यावरण के संतुलन एवं संतुलितवर्षा में यज्ञ का महत्वपूर्ण योगदान है। यज्ञ की उपयोगिता एवं सफलता के तीन प्रमुख आधार है। १. मंत्रों की ध्वनि का विज्ञान। २. दिव्य जड़ी-बूटियों एवं वनस्पतियां। ३. साधक की एकाग्रता एवं मनोबल।
यज्ञ को एक प्रकार का ऐसा यंत्र समझना चाहिए जिसके सभी पूर्जे ठीक-ठीक एवं उचित स्थान पर संलग्न हो। जो यज्ञ का ठीक प्रयोग जानते हैं तथा पूर्णत: एवं वर्चस्वी निश्चित रूप से होते हैं। यज्ञ की विधा एक ऐसी विद्या है जो अति प्राचीन काल से चली आ रही है। यहां तक की सृष्टि कीउत्पत्ति यज्ञ का फल कही जाती है। सृष्टि की रचना से पूर्व स्वयं शक्ति अर्जित करने के लिए यज्ञ किया एवं शक्ति प्राप्त की।
यज्ञ मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाने वाली अचूक औषधिरोगों की जड़ शरीर में नहीं, मन में होती है। यह मानकर अपने मानसिक संतुलन को सुस्थिर रखा जाय,तो कोई शारीरिक रोग होने पर भी वह जीवन क्रम सामान्य ढंग से चलाया जा सकता है। मानसिक संतुलन साधने के लिए यह मान्यता बड़ी ही उपयोगी सिद्ध हो सकती है। यह एक सुनिश्चित तथ्य है कि उस तथ्यको सभी रोगों में एक समान लागू होते देखा जा सकता है। उनकी प्रतिक्रिया, लक्षण शरीर पर भले ही दिखाई दें, लेकिन उनकी जड़ मनुष्य के मन में होती है। वृक्ष की जड़ जिस प्रकार जमीन के भीतर होती है और उसका तना, शाखाएँ, पत्ते, फूल, फल और शिखर आकाश में होते हैं। इसी प्रकार रोगों का स्वरूप, उत्पात, प्रतिक्रिया शरीर के तल पर दिखाई देते हैं, लेकिन उनका मूल मन में होता है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए महर्षियों ने हजारों वर्ष पूर्व कहा है।
प्रज्ञापराधं रोगस्य मूल कारणं अर्थात् प्रज्ञापराध, मानसिक अस्त-व्यस्त, असंतुलित मनःस्थिति, चिन्ता, क्षोभ और अन्यान्यमानसिक विकृतियाँ समस्त रोगों का मूल कारण है। यदि अपनी मानसिक स्थिति को सँभाला जाय, उसे शांत-संतुलित बनाया जाय, तो शरीर को पूर्ण स्वस्थ, निरोग और पुष्ट रखा जा सकता है। शरीर का निदान-परीक्षण बाद में, पहले मन को ही स्वस्थ बनाये रखने की बात सोचनी चाहिए। इसके लिए प्रचलितचिकित्सा पद्धतियों से परे मन को हलका-फुलका बनाने वाली किसी भी विधि का सहारा लिया जा सकता है। इसमें वैदिक कर्मकाण्ड द्वारा संपादित यज्ञ का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यज्ञोपैथी, ऐलौपैथी,नेचरोपैथी, होम्योपैथी, बायोकेमिकल चिकित्सा पद्धति आदि चिकित्सा प्रणालियों की तरह विभिन्न देशों में यज्ञों से भी रोगों के उपचार की विधि खोज ली गयी है और उसका सफलतापूर्वक उपयोग किया जाने लगा है।अब तो यज्ञ को मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाने वाली अचूक औषधि समझा जाने लगा है।
इस चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत रोगियों को यज्ञ के वायु से निकलने वाली तरंगों को श्वास-प्रश्वास के माध्यम से ही देने के लिए प्रशिक्षितकिया जाता है। पागल और विक्षिप्त समझे जाने वाले व्यक्तियों की मस्तिष्कीय क्षमता पहले ही प्रयास में इस योग्य तो नहीं बन पाती कि वे बताई गयी विधि का अक्षरशः पालन कर लें; लेकिन धीरे-धीरे वे एक-दूसरे के श्वास-प्रश्वास करने की शैली को पहचानने लगते हैं और तथा उन श्वास-प्रश्वास (प्राणायाम) द्वारा ही उत्तर देने लगते हैं। प्राणायाम के माध्यम से रोगी का यह क्रमधीरे-धीरे शरीर के अंतःस्थल तक भी पहुँच जाता है और परिणामतः रोगी के रोगमुक्त होने में दिनों-दिन सफलता प्राप्त होने लगती है।जिन व्यक्तियों को विक्षिप्त मान लिया जाता है और पागल समझकर समाज से अलग कर दिया जाता है, ऐसेव्यक्ति का दिमाग वास्तव में बेकार नहीं हो जाता है।
वस्तुतः लोग भावनाओं पर अत्यधिक ठेस लगने के कारण मस्तिष्कीय संतुलन खो बैठते हैं। कभी-कभी यह असर इतना गहरा हो जाता है कि वह व्यक्ति समाज की धारा से पूरी तरह कट-पिटकर अपने आप में सिमट जाता है। यज्ञ में भावनाओं को जाग्रत करनेऔर सम्बल देने को ही नहीं, उनके परिष्कृत बनाने तथा उनका संतुलन साधने की प्रभावशाली क्षमता है। शरीरशास्त्रियों की मान्यता है कि मस्तिष्क के कुछ भाग भावनाओं को उत्तेजित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यज्ञ से उत्पन्न तरंगों का उन अंगों पर बहुत अच्छा और अनुकूल प्रभाव पड़ता है। यज्ञ द्वारा मस्तिष्क की उन सिकुड़ी हुई मांस-पेशियों को शक्ति मिलती है। फलतः व्यक्ति को भावनात्मक बल और आनन्द मिलता है। वे पेशियाँ जो कारणवश निष्क्रिय हो जाती हैं,पुनः सक्रिय हो उठती हैं। इसी नियम को एक विधि- व्यवस्था के साथ रोग चिकित्सा के लिए अपनाया जाता है और अब तो जटिल से जटिल रोगों का उपचार भी यज्ञोपैथी द्वारा किये जाने की विधियाँ खोज ली गयी हैं। यज्ञोपैथी के माध्यम से रोगोपचार की यह पद्धति तो कुछ वर्षों पूर्व ही आविष्कृत की गयी है।
अब चिकित्साशास्त्रियों का ध्यान इस दिशा में भी गया है। बाहरी उपकरण इतना प्रभाव उत्पन्न कर सकतेहैं, तो स्वयं अपनी ही कर्म (यज्ञ करना) तो और अधिक प्रभाव उत्पन्न करते होंगे। इस विषय पर चिकित्साशास्त्रियों का ध्यान भले ही अभी गया हो, परन्तु यह तो प्राचीनकाल से जान, समझ लिया गया है कि यज्ञ के द्वारा समस्त रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। यज्ञ मनुष्य को न केवल हलका-फुलका व प्रफुल्लित कर देता है, वरन् उसकी कई चिंताओं, दबावों और तनावों तथा समस्याओं के बोझ को भी बड़ी सीमा तक समाप्त कर देता है।भारतीय मनीषियों ने यज्ञ की इस शक्ति को हजारों वर्ष पूर्व पहचान कर उसका उच्च उद्देश्यों के लिए प्रयोग करना आरंभ कर दिया था। यज्ञ साधना का अपना एक स्वतंत्र विज्ञान है। कोई आश्चर्य नहीं कि यज्ञ का स्वास्थ्य प्रयोजन के लिए उपयोग करते-करते विज्ञान इस तथ्य को भी बहुत जल्दी स्वीकार करने की स्थिति में आ जाय कि यज्ञ मानव मात्र, प्राणिमात्र के लिए सर्वतोभावेन कल्याणकारी है। वर्तमान की अनेकानेक समस्याओं का समाधान उसमें सन्निहित है।
यज्ञ का प्रभावसूक्ष्मविज्ञान पर आधारित यज्ञ की प्रभावोत्पादकता हविर्द्रव्यों , समिधाओं , मंत्रोच्चार , प्रयोक्ता के व्यक्तित्व एवं समय - विशेष पर आधारित होती है . इन सभी का समुचित संतुलन बन जानेपर यज्ञ में एक विशिष्ट प्रकार का चुम्बकीय प्रभाव एवं प्रवाह उत्पन्न होता है . यह यजनकर्त्ताके साथ-साथ सम्पूर्ण वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव प्रस्तुत करता है .प्राय: यज्ञ करने पर यज्ञीय धूम्र नीचे से ऊपर की ओर चलता है . यदि वायु स्थिर हो , हवा न चल रही हो तो इस धूएँ का बहाव सीधा एवं नियंत्रित होता है . वायु मिश्रित धूएँ में विद्युत् आविष्ट कणों तथा आयनों का एक कोलाईडल घोल होने के कारण इसके सीधे ऊपर की ओर चलने के वही प्रभावहोंगे ; जो की एक विद्युत् - प्रवाह के होते हैं . जिस तरह से किसी भी विद्युतीय - प्रवाह से चुम्बकीय क्षेत्र बनता है , उसी तरह से यज्ञकुंड से उठने वाले धूएँ के चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र बनता है और यह यजनकर्त्ता को सीधे प्रभावित करता है .यज्ञ - विज्ञान की प्रमाणिकता को सिद्ध करने के लिए यह आवश्यक है की हवन-कुंड से उठने वाली यज्ञ - शिखा का विस्तृत भौतिक विश्लेषण किया जाये .
इससे स्पष्ट हो जायेगा कि यज्ञ-कुंड से काफी मात्रा में विद्युत् चुम्बकीय तरंगे उठती हैं और ये माइक्रोवेव या अल्ट्राशोर्टवेव स्तर की होती हैं . इन तरंगों की प्रगाढ़ता यज्ञ-कुंड के आस-पास के वातावरण को ठंडा करने से और बढ़ जाती हैं . हवन कुंड के चारों ओर एक नाली बनाकर उसमें जल भरने से तथा यज्ञ शाला के निकट अनेक जल भरे कलश स्थापित करने को इसी उद्देश्य की पूर्ति के रूप में समझा जा सकता है .सस्वर मंत्रोच्चार से उत्पन्न ध्वनि - कम्पनों से यज्ञ-शिखा पर ऐसा प्रभाव पड़ता है कि जिसके कारण उससे निकलने वाली विद्युत् चुम्बकीय तरंगे प्रभावित होती हैं . इस तरह से रेडियो - प्रसारण जैसा एक तन्त्र भौतिकी के आधार पर कार्य करता हुवा देखा जा सकता है . हवन-कुंड विशेष धातुओं , जैसे चांदी या ताम्बे का बनाकर इन विद्युत् तरंगों की आवृत्ति तथा आवेग को नियंत्रित किया जा सकता है . साथ ही मंत्रोच्चार से स्वयं यजन कर्त्ता को विद्युत् चुम्बकीय तरंगों का केंद्र बनते हुवे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है .
सस्वर मंत्रोच्चार से उत्पन्न ध्वनि - कम्पनों से यज्ञ-शिखा पर ऐसा प्रभाव पड़ता है कि जिसके कारण उससे निकलने वाली विद्युत् चुम्बकीय तरंगे प्रभावित होती हैं . इस तरह से रेडियो - प्रसारण जैसा एक तन्त्र भौतिकी के आधार पर कार्य करता हुवा देखा जा सकता है . हवन-कुंड विशेष धातुओं , जैसे चांदी या ताम्बे का बनाकर इन विद्युत् तरंगों की आवृत्ति तथा आवेग को नियंत्रित किया जा सकता है . साथ ही मंत्रोच्चार से स्वयं यजन कर्त्ता को विद्युत् चुम्बकीय तरंगों का केंद्र बनते हुवे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है . मंत्रोच्चार करने वाले व्यक्ति की सम्पूर्ण काया शरीर में उठने वाली यांत्रिक कम्पनों से झंकृत होने लगती है . शरीर का पत्येक कोश-सेल एक इलेक्ट्रिक कैपेसिटर _ विद्युत् संधारित है . सुप्रसिद्ध विज्ञानवेत्ता बेस्ट एंड टेलर के अनुसार इसकी विद्युत् संधारित क्षमता _ इलेक्ट्रिक कैपेसिटेंस लगभग एक माइक्रोफेड प्रतिवर्ग सेंटीमीटर आंकी गयी है .सामान्यत: रेडियो तथा टेलीविजन आदि यंत्रों में लगने वाले विद्युत् संधारित्रों की क्षमता शरीरको कोशकीय क्षमताओं से कहीं कम होती है .
किसी भी मानक से इस क्षमता को बहुत विस्मयकारी कहा जासकता है . प्राय: व्यक्ति यह नहीं जानता कि उसके शरीर में इतनी भरी विद्युत्शक्ति को धारण करनेकी क्षमता है . जब शरीर का प्रत्येक अवयव _ कोश एवं ऊतक ध्वनि - कम्पनों से झंकृत होने लगता है ; तो भौतिकों के शब्दों में ये कम्पन एक विद्युत् संधारित्र के कम्पन मने जा सकते हैं तथा इन कम्पनों से विद्युत् चुम्बकीय तरंगों का बनना अवश्यम्भावी है . यही वैद्युतीय चुम्बकीय तरंगें हवनकुंड के आस-पास बैठे हुवे यज्ञ - कर्त्ताओं को सीधे भी प्रभावित करेंगी तथा परावर्तित होकर भी . इन तरंगों का परावर्तन इसलिए होना सम्भव है , क्योंकि यज्ञीय अग्नि - शिखा विद्युत् आवेशधारी आयनों तथा कणों का एक समूह है . इस समूह से विद्युत् चुम्बकीय तरंगें परावर्तित होकर मंत्रोच्चार करने वाले व्यक्ति तथा अन्य यजनकर्ताओं पर पड़ना वैसे ही समझा जा सकता है ; जैसे शार्टवेव रेडियो ट्रांसमीटर से चलने वाली विद्युत् चुम्बकीय तरंगें पृथ्वी के वायुमंडल आयस्नोफीयर परत से टकराकर वापिस आती हैं और पृथ्वी की गोल स्थ पर दूर - दूर तक फ़ैल जाती है .
इस प्रक्रिया में अग्निशिखा को एक प्रबल एम्प्लीफायर या प्रवर्तक के रूप में माना जा सकता है ,जिसमें विद्युत् का स्रोत विद्युत् लाइन या सेल नहीं , वरन यज्ञीय ऊर्जा _ अग्निशिखा है . यज्ञ का प्रभाव मनुष्य के शरीर पर नहीं ; मन और अन्तश्चेतना पर भी पड़ता है . इसका स्थूल रूप यज्ञोपैथी के रूप में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है . यज्ञोपैथी में स्थूल चुम्बकों का प्रयोगतो नहीं होता ; पर यज्ञ - प्रक्रिया के फलस्वरूप चुम्बकीय क्षेत्र और प्रबल विद्युत् तरंगें अवश्य बनती हैं . यज्ञीय धूम्र में ऋण आवेशग्रस्त कणों का होना रसायनशास्त्र के आधार पर स्पष्टरूप से समझा जा सकता है . ये कण नीचे से ऊपर की ओर चलते हैं ओर भौतिकी के प्रचलित नियमों के अनुसर धुंए की इस प्रवाह - प्रक्रिया को ऊपर से नीचे की ओर चलने वाले एक विद्युत् करेंट के समतुल्य समझा जा सकता है . यह करेंट जो विद्युत् - क्षेत्र बनाएगा , उसका उत्तरी ध्रुव यज्ञ - कुंड के उत्तर की ओर तथा दक्षिणी ध्रुव यज्ञकुंड के दक्षिण की ओर होगा .
यज्ञ से उत्पन्न होने वाला यह चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की काट नहीं करेगा , वरन दोनों जुड़कर एकसशक्त चुम्बक जैसा प्रभाव डालेंगे . क्योंकि यज्ञ - धूम्र यज्ञशाला के समूचे वातावरण में फ़ैल जाता है , इसलिए यह चुम्बकीय क्षेत्र यजन कर्त्ता को समान रूप से प्रभावित करता है . प्रचलित चुम्बक चिकित्सा में प्रयोग किए जाने वाले बड़े-बड़े चुम्बक , जो मात्र शरीर के कुछ ही स्थानों या भागों पर प्रभाव डालते हैं; इसकीअपेक्षा यज्ञ-धूम्र के छोटे-छोटे चुम्बकीय प्रभावधारी कण सूक्ष्म होने के कारण कहीं अधिक लाभकारी होते हैं . यज्ञ चिकित्सा की प्रभावोत्पादकता का एक यह भी रहस्य है।
वास्तव में हमारी पुरातन वैदिक यज्ञ - पद्धति पूर्णतया विज्ञान- सम्मत है . पूर्व समय में हर घर परिवार में नित्य यज्ञ होता था और सभी निरोग रहते थे . यज्ञ के माध्यम से सभी संस्कार होते थे और इसी से निखर कर मनुष्य दैविक गुणों को धारण करता था . यज्ञ से साधना , संस्कार , तप आदि का श्रीगणेश होता है . यज्ञ मात्र संस्कार ही नहीं , अपितु साधना की सतत प्रक्रिया है।
Monday, 25 July 2016
ये ठीक नही किया हाफिज सईद ने , दिल तोड़ दिये राजदीप,सागरिका,शेखर गुप्ता, रविश कुमार,अभिज्ञान,अभिसार,पुण्य प्रसून बाजपेयी,राणा अयूब और सबा नकवी जैसे पत्रकारों के , हाफिज सईद बताये क्या कसूर था इनका क्यों अकेले बरखा दत्त का नाम लिया बहुत नाइंसाफी है ये तो, इन्होंने तो अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ हाफिज सईद जैसे आतंकवादियो का समर्थन करने और उन्हें मासूम बताने में लगा दी और हाफिज सईद है कि सिर्फ बरखा दत्त को अपना हमदर्द बताते है , हाफिज सईद को बयान जारी कर इन लोगो से माफ़ी मांगनी चाहिए
एक बार पांडवो (युधिष्ठिर मौजूद नही थे ) ने भगवान कृष्ण से पूछा कि " कलयुग क्या है और कलयुग में क्या होगा "
भगवन कृष्ण मुस्कुराये और कहा ' चलो मैं तुम सबको कलयुग में क्या होगा दिखलाता हूँ '
कृष्ण ने धनुष निकाला और चारो दिशाओ में चार तीर चला दिए और पांडवो को आदेश दिया कि उन तीरो को वापिस लेकर आओ.
चारो पांडव विभिन्न दिशाओ में तीर की तलाश में चले गए
जब अर्जुन ने तीर उठाया तो उन्होंने बहुत मीठी आवाज़ सुनी वो पालते और उन्होंने देखा कि कोयल बहुत ही मधुर स्वर में गा रही थी लेकिन साथ ही में एक जिन्दा खरगोश का मांस खा रही थी और खरगोश को बहुत तकलीफ हो रही थी. अर्जुन इतनी सुन्दर पक्षी द्वारा रक्तरंजित कार्य करते देखकर बहुत ही आश्चर्यचकित हुए और उन्होंने तत्काल वह स्थान छोड़ दिया.
भीम ने जहाँ से तीर उठाया वहाँ पर पांच कुए थे एक कुआ मध्य में था और चार कुए उस कुए के चारो तरफ मौजूद थे बाहर के चारो कुओ में बहुत ही मीठा पानी भरा हुआ था और उन चारो कुओ से पानी बाहर बह रहा था लेकिन बीच का कुआ खाली था और उसमे दूसरे कुओ का बहता पानी नही जा रहा था यह देखकर भीम भी दुविधा में पड़ गए और वहाँ से चल दिए.
नकुल तीर उठाकर वापिस लौट रहे थे तो उन्होंने एक स्थान पर देखा कि एक गाय बछड़े को जन्म देने वाली थी , गाय ने बछड़े को जन्म देने के बाद उसे चाटना शुरू किया और बछड़े के साफ़ होने के बाद भी बछड़े को चाटती रही लोगो ने बड़ी मुश्किल से दोनों को अलग किया लेकिन तब तक बछड़ा बुरी तरह से घायल हो चूका था। नकुल गाय जैसे शांत जानवर के इस तरह के व्यवहार से बड़े ही आश्चर्यचकित हुए।
सहदेव को जहा से तीर मिला वह स्थान पहाड़ के पास था और उन्होंने पहाड़ से एक बड़े शिलाखण्ड को नीचे गिरते देखा। शिलाखण्ड चट्टानों को तोड़ता हुआ और बड़े बड़े वृक्षो को कुचलता हुआ नीचे आ रहा था लेकिन उसी शिलाखण्ड को एक छोटे से पौधे ने रोक दिया. सहदेव भी यह नज़र देखकर आश्चर्यचकित हुए.
सभी पांडवो ने कृष्ण से इन घटनाओ का अर्थ पूछा। कृष्ण मुस्कुराये और पांडवो को इन घटनाओ का मतलब समझाना शुरू किये
' कलयुग में धर्मगुरुओ के पास बहुत मधुर वाणी होगी और उनके पास बहुत ज्ञान भी होगा लेकिन वो भक्तो का वैसा शोषण करेंगे जैसा कोयल खरगोश के साथ कर रही थी '
' कलयुग में गरीब अमीरो के बीच रहेंगे और उन अमीरो के पास इतनी धन दौलत होगी जिसे वो संभाल भी नही पाएंगे लेकिन वो गरीबो को एक कौड़ी भी देंगे जैसे चारो कुए मीठे पानी से तो लबालब थे लेकिन खाली पड़े कुए को एक पानी की बून्द भी नही जा रही थी '
' कलयुग में माँ बाप अपने बच्चो को इतना लाड बप्यार देंगे कि वो बच्चे वास्तव में बिगड़ जायेंगे और अपनी जिंदगी ख़राब कर लेंगे जैसे कि गाय अपने बछड़े को प्यार दर्शा रही थी.'
' कलयुग में लोग अपने चरित्र से उतनी ही तेजी से गिरेंगे जैसे वह शिलाखण्ड पहाड़ पर से गिर रहा था और उनके पतन को कोई भी नही रोक पायेगा सिवाय ईश्वर के नाम के जप के , ईश्वर के नाम का जप उन्हें नीचे गिरने से वैसे ही रोक लेगा जैसा उस छोटे पौधे ने शिलाखण्ड को रोक लिया था '
उद्धव गीता से साभार
Sunday, 17 July 2016
हिजबुल मुजाहदीन कमांडर बुरहान बानी जिसके ऊपर १० लाख का इनाम था, कर्नल एम एन राय को धोखे से बुलाकर उनकी हत्या कर दे तो राजदीप,सागरिका,बरखा,पूण्य प्रसून,अभिज्ञान,अभिसार,राहुल कँवल और शेखर गुप्ता के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई और आर्मी के जवान बुरहान बानी का एनकाउंटर कर दे मानव अधिकारों का हनन , अगर कश्मीर के आदमी,महिलाएं और बच्चे सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके उनके सर फोड़े सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला करे तो राजदीप,सागरिका,बरखा,पूण्य प्रसून,अभिज्ञान,अभिसार,राहुल कँवल और शेखर गुप्ता के लिए उनका आक्रोश और अगर हमारे सुरक्षा बल बचाव और उन्हें रोकने के लिए पेलेट गन का उपयोग करें तो राजदीप,सागरिका,बरखा,पूण्य प्रसून,अभिज्ञान,अभिसार,राहुल कँवल और शेखर गुप्ता के लिए अत्याचार, क्या कीजियेगा इन देशद्रोही मानसिकता के भारतीयों का, अरे क्षमा चाहता हूँ ये भारतीय कहाँ है ये तो पैदा यहाँ हुए है दिल से तो ये ...........
Wednesday, 29 June 2016
भारत के एन एस जी ( न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप ) का सदस्य नहीं बनने पर हल्ला मचाने वाले भारत के एम टी सी आर ( मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजिम ) का सदस्य बनने पर बधाई तो दूर आवाज़ तक करने को तैयार नहीं है जबकि एम टी सी आर का सदस्य बनने के लिए चीन १० वर्षो से प्रयास कर रहा है और भारत के सदस्य बनने के बाद बुरी तरह से बौखला गया है क्यूंकि चीन जनता है कि अब भारत चीन के एम टी सी आर के सदस्य बनने पर वैसे ही अड़ंगे लगायेगा जैसा चीन ने भारत के एन एस जी के सदस्य बनने पर लगाया है और अब भारत पूरे विश्व को ब्रम्होस और अन्य मिसाइल और मिसाइल टेक्नोलॉजी बेच सकेगा , निश्चित ही इस सफलता पर भारत सरकार बधाई की पात्र है। जय हो
Friday, 17 June 2016
भारत ने ऑस्ट्रेलिया से ४ - २ गोल से हारने के बाबजूद ३६वी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहली बार अपनी जगह बना ली क्यूंकि बेल्जियम और इंग्लैंड का मैच ३ - ३ गोल से बराबरी पर छूटने से भारत ७ अंको के साथ फाइनल में पहुँच गया. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि भारत के कई वरिष्ठ खिलाडी जैसे सरदार सिंह, वीरेंद्र लाकरा, रुपिन्दर पाल सिंह इत्यादि इस टूर्नामेंट में नहीं खेल रहे है। भारतीय हॉकी टीम को फाइनल में पहुँचने पर बधाई और फाइनल में जीतने के लिए अग्रिम शुभकामनाये, ओलिम्पिक गेम्स के लिए भी अच्छा संकेत है
Tuesday, 14 June 2016
कई लोग पूछते है कि युगपुरुष के प्रति इतने कठोर क्यों है ? इसका उत्तर बड़ा स्पष्ट है, ये राजनीति में यह कह कर आये थे कि ये सेवा करने के लिए आये है, इनके विधायक आधी सैलरी में काम करेंगे ( ये अलग बात है कि इन्होने अपने विधायकों की सैलरी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी ज्यादा कर ली ) ये कसम खा कर आये थे कि सिद्धांतो की राजनीति करेंगे ( ये अलग बात है कि इन्होने अपना कानून मंत्री उसको बनाया जिसकी डिग्रियां ही गैर क़ानूनी थी ) ये कह कर आये थे कि हम भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे (ये अलग बात है कि इन्होने गोपाल राय को परिवहन मंत्री बनाया जिन्हे भ्रष्टाचार केारोपो में इस्तीफा देना पड़ा और इनके स्वास्थ्य मंत्री भी जल्दी जाने वाले है ) युगपुरुष ये कह कर आये थे कि गाड़ी नहीं लूंगा बंगला नहीं लूंगा पर सब लिया ये कह कर आये थे कि पार्टी लोकतान्त्रिक तरीके से चलेगी पर यह एक व्यक्ति की जेबी पार्टी बनकर रह गई और जब इनका विरोध करने की कोशिश योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण ने की तो उन्हें धक्के देकर बाहर निकाल दिया। आज सारे न्यूज़ चैनल्स पर आप के प्रवक्ताओ के चेहरे देखने लायक थे उनकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि कैसे जबाब दे और एक चैनल पर योगेन्द्र यादव ने जो सवाल पूछे वाकई सोचने लायक है , जब इन विधायकों को विभिन्न विभागों की समिति में रखा जा सकता था तो इन्हे संसदीय सचिव क्यों बनाया, फरवरी मार्च में जब आप पार्टी में विद्रोह हुआ तो क्या इन विधायकों पार्टी सेअलग होने से रोकने के लिए संसदीय सचिव बनाया और अगर इनकी नियुक्ति सही और नैतिक थी तो फिर ऐसे बिल लाकर इनको बचाने के प्रयास की क्या जरूरत थी और आप के विधायकों ने जो जबाब चुनावआयोग को दिया है वह तो वाकई लाजबाब है इन्होने जबाब दिया है कि ये इन विभागों में इंटर्न है जैसे कोई छात्र अपनी पढाई पूरी कर इंटर्नशिप करता है हा हा हा कुल मिलकर यही कहा जा सकता है कि ये भी दूसरे नेताओं जैसे ही है
Saturday, 11 June 2016
हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ५ जून को अपनी विदेश यात्रा शुरू कर अफगानिस्तान पहुँचते है, जहां से उसी दिन कतर पहुँच जाते है, अगले दिन कतर में बैठके पूरी कर स्विट्ज़रलैंड पहुँच जाते है और वहां से अमेरिका पहुँच कर दो दिन में कई बैठकों में भाग लेकर ९ जून को मेक्सिको पहुँच कर उसी रात भारत के लिए रवाना हो जाते है, आश्चर्यजनक बात यह है कि उन्होंने अपनी पूरी यात्राएं रात्रि में की और पांचो देशो में दिन में बैठकों में हिस्सा लिया , इतना ही नहीं १० जून को सुबह भारत पहुँच कर ९ बजे मीटिंग्स में हिस्सा लेना शुरू कर देते है जो रात तक चलती है ऐसे है हमारे प्रधानमंत्री, फिर क्यों ना भारतवासी अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी पर गर्व करें वो है ही ऐसे जिन पर गर्व किया जा सकता है जय हो
Thursday, 9 June 2016
कल मेरे कुछ मित्रो ने फेसबुक पर लिखा कि नरेंद्र मोदी ही नहीं मनमोहन सिंह और अन्य प्रधानमंत्रियों को भी स्टैंडिंग ओवेशन दिए और तालिया बजाई गई है, बिलकुल सही बात है पर अंतर देखने के लिए मैंने नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह दोनों के यूएस कांग्रेस में भाषण देखे , मनमोहन सिंह को भाषण शुरू होने और खत्म होने के बाद स्टैंडिंग ओवेशन मिला और भाषण के दौरान १० या ११ बार ताली बजी , मनमोहन सिंह ने पूरा भाषण कागजो में से पढ़ा और पूरे सदन में सीनेटर कागजो में लिखे भाषण को पढ़ते रहे एक और दिलचस्प दृश्य भी था बराक ओबामा सीनेटर के रूप में वहां मौजूद थे , जबकि नरेंद्र मोदी को नौ बार स्टैंडिंग ओवेशन मिले और ६६ बार तालिया बजी और सीनेटर पूरे समय मोदी का भाषण सुनते रहे और उनका ध्यान हाथ में थमे कागजो पर नहीं था और भाषण खत्म होने के बाद सीनेटर्स में मोदीजी से ऑटोग्राफ लेने की और हाथ मिलाने की होड़ मची थी, एक और बड़ी बात जो मोदीजी के भाषण में थी वो था आतंकवाद पर पूरे विश्व को स्पष्ट सन्देश और भारत के बढ़ते हुए प्रभाव को प्रभावशाली ढंग से रखना और अमेरिकन्स को यह बताना कि भारत अमेरिका पार्टनरशिप से अकेले भारत को फायदा नहीं है अमेरिका को भी उतना ही फायदा है ,ये था अंतर दो प्रधानमंत्रियों के भाषण और उसके प्रभाव में
Tuesday, 31 May 2016
लोग कहते है इस देश में असहिषुणता है बोलने और लिखने की आज़ादी नहीं है , तन्मय भट्ट जैसा दो कौड़ी का आदमी भारत रत्न लता मंगेशकरजी के लिए अभद्र वाहियात निकृष्ट अक्षम्य भाषा का प्रयोग करता है और देश के सूडो सेक्युलर नेता,पत्रकार,सामाजिक कार्यकर्ता चुप्पी साधे रहते है इन्हे तो छोडिए देश की जनता जो लताजी को सुन सुन कर बड़ी हुयी है नींद नहीं आने पर लताजी के गाने सुनकर सोये है, बैचेन होने पर लताजी के गाने सुनकर मन को शांत किया है चुप्पी साधे रहती है, मजाल है कोई कुछ बोल दे और किसी की शारीरिक बनावट का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए क्यूंकि उन्हें ईश्वर ने रचा है पर खेद के साथ लिखना पढ़ रहा है कि तन्मय भट्ट जरा अपनी शारीरिक बनावट पर कभी ध्यान दिया है तुमसे अच्छी बनावट तो गेंडे सूअर की होती है आईने मेखुद को देख लिया होता तो कभी सपने में भी देश की आन बान शान लता दीदी का मजाक नहीं बना पाते पर तुम तो मोटी चमड़ी के हो मुझे खेद तो इन देश के सूडो सेक्युलर नेता,पत्रकार,सामाजिक कार्यकर्ता की चुप्पी पर है, कुछ लोगो का कहना है कि तन्मय भट्ट जैसे गेंडे (गेंडे से माफ़ी सहित ) की सार्वजनिक भर्तस्ना नहीं की गयी तो इसके जैसे अभद्र लोगो को बढ़ावा ही मिलेगा
Wednesday, 25 May 2016
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद ( ICMR) ने अपने अध्ययन में पाया है कि वर्तमान में भारत देश में कैंसर के कुल 14 लाख ३० हजार मरीज है जिनमेंसे लगभग ७ लाख की २०१६ में ही मृत्यु हो जाएगी इन कैंसर के मरीजों मे अधिकतर ब्रैस्ट,फेफड़ों और बच्चेदानी के कैंसर के है और इन १४ लाख ३० हज़ार केसो में से लगभग ३ लाख ७० हज़ार मरीज सिर्फ पंजाब में है ( ज्ञात रहे कि खेती के लिए पेस्टिसाइड का अधिकतम उपयोग पंजाब में ही होता है) और पंजाब में एक ट्रेन का नाम ही कैंसर एक्सप्रेस है जो मरीजों को चंडीगढ़ ले जाती है कैंसर की बीमारी जितनी दर्दनाक है उतना ही तकलीफदेह उसका इलाज भी है और कैंसर का इलाज भी बहुत महंगा है जिसे करने में परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ जाती है और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद ( ICMR) ने अपने अध्ययन में यह भी पाया है कि वर्ष २०२० तक कैंसर के मरीजों की संख्या में १७ लाख ३० हजार का इजाफा और हो जायेगा, कैंसर होने के दो मुख्य कारण तम्बाकू का सेवन और पेस्टिसाइड है, रही बात पेस्टिसाइड की तो हम किस चीज़ में पेस्टिसाइड नहीं खा रहे है, अनाज ( गेहूं,मक्का,चावल,बाजरा ), दाले (चना,मसूर,अरहर,मूंग उड़द ), सब्जियां,फल,दूध सभी में तो पेस्टिसाइड (कीटनाशक ) है और क्यों ना हो हमारे देश के अधिकतर हिस्से में खेती करने के कीटनाशकों अर्थात पेस्टिसाइड का भरपूर उपयोग हो रहा है फफूंद के लिए कीटनाशक, कीड़ों के लिए कीटनाशक, इल्ली के लिए कीटनाशक,फसलों में होने वाले कचरे के लिए कीटनाशक, अगर यू ही हम कीटनाशकों का प्रयोग करते रहे तो विश्वास मानिये छोटी उम्र में ही कैंसर होने लगेगा, और इस पर अगर हमे रोक लगानी है तो हमे तम्बाकू के सेवन पर रोक लगनी होगी और हमे अपनी पुरातन जैविक और प्राकर्तिक खेती की और लौटना होगा क्यूंकि इसी तरीके से हम अपने खानपान में पेस्टिसाइड की मात्र कम कर पाएंगे और कैंसर के बढ़ते हुये खतरे पर रोक लगा पाएंगे अन्यथा
Sunday, 22 May 2016
ये सच्ची घटना है जो हमारा सिर गर्व से ऊँचा कर देती है कि हमने ऐसा प्रधानमंत्री चुना है , ये घटना वर्ष १९९० की गर्मियों की है जब दो लड़कियां रेलवे में अपनी नौकरी के प्रोबेशन पीरियड में लखनऊ से दिल्ली तक ट्रेन से सफर करती है और ट्रेन में सफर कर रहे दो सांसदों के साथ के १०-१२ कार्यकर्ता इन दोनों लड़कियों को अपनी सीट खाली करने पर मजबूर कर देते है और भद्दे कमेंट करते है जिसकी वजह से दोनों लड़कियां मानसिक रुप से विचलित हो जाती है,इसके बाद ये दोनों लड़कियां दिल्ली से अहमदाबाद के लिए ट्रेन पकड़ती है पर उन्हें रिजर्वेशन नहीं मिलता है उन्हें टीटीई एक कूपे में बिठा देता है जिसमे पहले से दो कुर्ते पजामे में नेता बैठे हुए थे, दोनों नेता अपना नाम बताते है पर वो भूल जाती है फिर कई विषयों पर चर्चा होती है जो उम्र में बड़े थे वो तो बड़े उत्साह से चर्चा में हिस्सा लेते है पर छोटी उम्र के नेता शांत बैठे रहते है जैसे ही एक लड़की श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम लेती है तो अचानक ही वो नेता इनसे पूछते है कि वो श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कैसे जानती है तब वो लड़की बताती है कि जब उनके पिता कोलकत्ता यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तो कुलपति श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन्हें स्कालरशिप दिलवाई थी और कश्मीर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अचानक मौत से वो बहुत दुखी हुए थे। फिर चार थाली भोजन आता है तब छोटी उम्र वाले नेता उसका पैसा चूकते है,तभी टीटीई आता है और लड़कियों से बोलता है कि ट्रेन में कोई बर्थ खाली नहीं है तो दोनों नेता टी टी ई को कहते है कि हम मैनेज कर लेंगे और वो नेता दोनों लड़कियों को अपनी सीट दे देते है और खुद नीचे चादर बिछा कर सो जाते है सुबह जब अहमदाबाद आता है तब वरिष्ठ नेता लड़कियों से कहते है कि अगर अहमदाबाद में ठहरने की कोई दिक्कत हो तो वो उनके घर रूक सकती है,इस पर कनिष्ठ नेता कहते है कि उनका खुद का कोई घर नहीं है इसलिए वो वरिष्ठ नेता के घर रुक सकती है पर लड़कियां कहती है कि उनके रुकने की व्यवस्था है फिर वो लड़कियां उन नेताओं से जिन्होंने उनके दिमाग में नेताओं की एक अलग छवि बना दी थी के नाम पूछती है और उनके नाम अपनी डायरी में लिख लेती है शंकर सिंह बाघेला और नरेंद्र मोदी, इस घटना के बारे में असम के अखबारों में १९९५ में छपा था और हिन्दू अख़बार में १ जून २०१४ को छपा था और उनमे से एक लड़की अब दिल्ली में रेलवे सूचना केंद्र में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत है। ऐसे है हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी A train journey and two names to remember LEENA SARMA PRINT · T T
inShare 36 3 899 Of two co-travellers who surprised the writer with theirgraciousness, 24 years ago
Shankersinh Vaghela and Narendra Modi, who between them left a lasting impression on two strangers in 1990, in Ahmedabad in May 2014. Shankersinh Vaghela and Narendra Modi, who between them left a lasting impression on two strangers in 1990, in Ahmedabad in May 2014. It was the summer of 1990. As Indian Railway (Traffic) Service probationers, my friend and I travelled by train from Lucknow to Delhi. Two MPs were also travelling in the same bogie. That was fine, but the behaviour of some 12 people who were travelling with them without reservation was terrifying. They forced us to vacate our reserved berths and sit on the luggage, and passed obscene and abusive comments. We cowered in fright and squirmed with rage. It was a harrowing night in the company of an unruly battalion; we were on edge, on the thin line between honour and dishonour. All other passengers seemed to have vanished, along with the Travelling Ticket Examiner.
We reached Delhi the next morning without being physically harmed by the goons, though we were emotionally wrecked. My friend was so traumatised she decided to skip the next phase of training in Ahmedabad and stayed back in Delhi. I decided to carry on since another batchmate was joining me. (She is Utpalparna Hazarika, now Executive Director, Railway Board.) We boarded an overnight train to Gujarat’s capital, this time without reservations as there wasn’t enough time to arrange for them. We had been wait-listed.
We met the TTE of the first class bogie, and told him how we had to get to Ahmedabad. The train was heavily booked, but he politely led us to a coupe to sit as he tried to help us. I looked at the two potential co-travellers, two politicians, as could be discerned from their white khadi attire, and panicked. “They’re decent people, regular travellers on this route, nothing to worry,” the TTE assured us. One of them was in his mid-forties with a normal, affectionate face, and the other in his late-thirties with a warm but somewhat impervious expression. They readily made space for us by almost squeezing themselves to one corner.
They introduced themselves: two BJP leaders from Gujarat. The names were told but quickly forgotten as names of co-passengers were inconsequential at that moment. We also introduced ourselves, two Railway service probationers from Assam. The conversation turned to different topics, particularly in the areas of History and the Polity. My friend, a post-graduate in History from Delhi University and very intelligent, took part. I too chipped in. The discussion veered around to the formation of the Hindu Mahasabha and the Muslim League.
The senior one was an enthusiastic participant. The younger one mostly remained quiet, but his body language conveyed his total mental involvement in what was being discussed, though he hardly contributed. Then I mentioned Syama Prasad Mookerjee’s death, why it was still considered a mystery by many. He suddenly asked: “How do you know about Syama Prasad Mookerjee?” I had to tell him that when my father was a post-graduate student in Calcutta University, as its Vice-Chancellor he had arranged a scholarship for the young man from Assam. My father often reminisced about that and regretted his untimely death [in June 1953 at the age of 51].
The younger man then almost looked away and spoke in a hushed tone almost to himself: “It’s good they know so many things ...”
Suddenly the senior man proposed: “Why don’t you join our party in Gujarat?” We both laughed it off, saying we were not from Gujarat. The younger man then forcefully interjected: “So what? We don’t have any problem on that. We welcome talent in our State.” I could see a sudden spark in his calm demeanour.
The food arrived, four vegetarian thalis . We ate in silence. When the pantry-car manager came to take the payment, the younger man paid for all of us. I muttered a feeble ‘thank you’, but he almost dismissed that as something utterly trivial. I observed at that moment that he had a different kind of glow in his eyes, which one could hardly miss. He rarely spoke, mostly listened.
The TTE then came and informed us the train was packed and he couldn’t arrange berths for us. Both men immediately stood up and said: “It’s okay, we’ll manage.” They swiftly spread a cloth on the floor and went to sleep, while we occupied the berths.
What a contrast! The previous night we had felt very insecure travelling with a bunch of politicians, and here we were travelling with two politicians in a coupe, with no fear.
The next morning, when the train neared Ahmedabad, both of them asked us about our lodging arrangements in the city. The senior one told us that in case of any problem, the doors of his house were open for us. There was some kind of genuine concern in the voice or the facial contours of the otherwise apparently inscrutable younger one, and he told us: “I’m like a nomad, I don’t have a proper home to invite you but you can accept his offer of safe shelter in this new place.”
We thanked them for that invitation and assured them that accommodation was not going to be a problem for us.
Before the train came to a stop, I pulled out my diary and asked them for their names again. I didn’t want to forget the names of two large-hearted fellow passengers who almost forced me to revise my opinion about politicians in general. I scribbled down the names quickly as the train was about to stop: Shankersinh Vaghela and Narendra Modi.
I wrote on this episode in an Assamese newspaper in 1995. It was a tribute to two unknown politicians from Gujarat for giving up their comfort ungrudgingly for the sake of two bens from Assam. When I wrote that, I didn’t have the faintest idea that these two people were going to become so prominent, or that I would hear more about them later. When Mr. Vaghela became Chief Minister of Gujarat in 1996, I was glad. When Mr. Modi took office as Chief Minister in 2001, I felt elated. (A few months later, another Assamese daily reproduced my 1995 piece.) And now, he is the Prime Minister of India.
Every time I see him on TV, I remember that warm meal, that gentle courtesy, caring and sense of security that we got that night far from home in a train, and bow my head.
(The author is General Manager of the Centre for Railway Information System, Indian Railways, New Delhi. leenasarma@rediffmail.com)
Saturday, 21 May 2016
अभी हाल ही में दसवीं और बारहवीं क्लासेस के रिजल्ट आये है जिसमें कई बच्चों ने बहुत उत्कृष्ठ परिणाम प्राप्त किये जबकि कुछ बच्चे असफल रहे है और यह देखने आ रहा है कि इन परीक्षाओं में सफल नहीं होने पर इनमे से कुछ बच्चे हताशा में कुछ ऐसे कदम उठा रहे है जो ना सिर्फ उनके परिवारों के लिए बहुत ही दुखदायी है बल्कि समाज और देश के लिए भी नुकसानदेह है .यहाँ इन बच्चों को यह समझने की जरुरत है कि एक परीक्षा में असफल होने का मतलब जीवन में प्रगति के सभी रास्ते बंद होना नहीं है, जीवन में कई बार ऐसे मौके आते है जब हम हताशा महसूस करते है पर इसका यह मतलब नहीं कि हम अपना जीवन ही समाप्त कर ले क्यूंकि जिंदगी बड़ी कीमती है एक ही बार मिलती है और छात्रों के ऐसे कदम से उनका परिवार बिखर जाता है इसलिए जब छात्रों के परीक्षा परिणाम आने वाले हो तो माँ बाप को उनका ख्याल रखना चाहिए उन्हें छात्रों पर सर्वोत्कृष्ठ परिणाम के लिए दबाब नहीं डालना चाहिए क्यूंकि परिवार की अपेक्षाओं पर पूरा नहीं उतरने पर भी छात्र ऐसे कदम उठने पर मजबूर हो जाते है इसीलिए कृपया बच्चों पर इतने दबाब ना बनाए कि वो ऐसे कदम उठा ले जो पूरे परिवार को तहस नहस कर दे, और बच्चों असफलता भी भी सफलता की और एक कदम है अगर एक बार असफल हो गए तो अगली बार हम उससे भी बेहतर परिणाम ला सक्ते है जय हो
पूरे भारत इस समय तेज गर्मी की चपेट में है , गर्म हवा की लपटे आदमी को झुलसा रही है , राजस्थान के कई शहरो में तापमान ५० डिग्री से ऊपर चला गया है अन्य राज्यों में भी यही हाल है लोग लू से मर रहे है राजस्थान और दादर में तो सड़के पिघलने लगी है सब लोग सूर्य देवता को कोसने में लगे हुए है पर खुद की गिरेवान में झांक कर देखने के लिए कोई तैयार नहीं है, देशवासियो को लगता है कि सभी जिम्मेदारी सरकार की है क्यूंकि हमने तो वोट देकर सरकार बना दी, अब ये सिर्फ सरकार का कर्तव्य है कि वो पेड़ पौधे लगवाये, प्राकर्तिक असंतुलन दूर करें हम कुछ नहीं करेंगे हम तो सरकार को कोसेंगे,भगवन को कोसेंगे कि इतना तापमान क्यों है, अभी भी वक्त है सम्हल जाइये उठ कर खड़े हो जाइये और संकल्प कीजिये कि हर देशवासी कम से कम ५ पेड़ पौधे लगाएगा, हर काम सरकार नहीं कर सकती। अगर अभी भी नहीं सम्हले तो जैसा मैंने तीन वर्ष पूर्व लिखा था कि अगर हम यूं ही प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब प्रकृति हमारे साथ खिलवाड़ करेगी और वह बात अब सच होती दिखाई दे रही है, क्यूंकि शास्त्रों में लिखा हुआ है कि प्रकृति माँ पार्वती का स्वरुप है और उसके संरक्षक महादेव है तो अगर हम प्रकृति से खिलवाड़ करेंगे तो महादेव क्रोधित होकर तांडव करेंगे और मुझे तो यही लग रहा है कि इसकी शुरुआत हो चुकी है जय हो
Wednesday, 18 May 2016
हम पिछले १६-१७ सालो से बाजपेयी सरकार को कोसते हुये आये है कि दिसंबर १९९९ में आतंकवादियों ने जब विमान अपहरण कर लिया था और विमान को कंधार (अफगानिस्तान ) ले गए थे तो यात्रियों की जान बचने के लिए मसूद अज़हर समेत ३ खूंखार आतंकवादी बाजपेयी सरकार ने छोड़ दिए थे
लेकिन यू पी ए सरकार के कारनामे के आगे बाजपेयी सरकार का कृत्य कुछ भी नहीं है, पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए यूपीए सरकार ने जो सद्भावना मिशन शुरू किया था पड़ोसी देश ने उसकी आड़ में भारत के साथ विश्वासघात करने का काम किया है। साल 2010 में यूपीए सरकार ने पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए सद्भावना मिशन के तहत जैश ए मोहम्मद के जिस आतंकी शाहिद लतीफ को छोड़ा था उसी ने पठानकोट में हुए आतंकी हमले का तानाबाना बुना था। सूत्रों के अनुसार शाहिद लतीफ ही पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड है। उच्च सूत्रों ने बताया कि 47 साल का शाहिद लश्कर ए तोएबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश ए मोहम्मद के उन 25 आतंकियों में से एक था जिन्हें रिहा किया गया। तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों में सुधार के लिए 28 मई 2010 को जम्मू, श्रीनगर, आगरा, वाराणसी, नैनी और तिहाड जेल से 25 आतंकियों को रिहा करके वाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तान भेज दिया था।
11 साल भारत की जेल में बंद रहे लतीफ को छुड़वाने के लिए तब भी प्रयास किया गया था जब दिसंबर 1999 में लश्कर के आतंकियों ने इंडियन एयरलाइंस के प्लेन को हाइजैक कर लिया था। जैश के चीफ मौलाना मसूद अजहर और उसके साथ दो आतंकियों को तब वाजपेयी सरकार ने रिहा कर दिया था, लेकिन लतीफ और अन्य 31 आतंकियों को छोड़ने से इंकार कर दिया गया था।
कांग्रेस सरकार यानी यूपीए- 2 ने लतीफ सहित 40 आतंकवादियों को गुप-चुप पाकिस्तान को सौंप दिया था 2006 में, यह अब पता चल रहा है। काहे, किसके दबाव या मोह में छोड़ा ? इसी लतीफ को फिर से पकड़ने के लिए वर्तमान सरकार ने रेड कार्नर नोटिस जारी कराने की पहल की है। अब तो यह भी देश जानना चाहेगा कि यूपीए-1 और 2 ने ऐसे और कितने देशघाती काम किये हैं !
वाह रे यू पी ए सरकार ! और क्या-क्या देश-विरोधी काम किया है वर्तमान सरकार को साहस करके सब बता देना चाहिए ।
कोई ज़रूरी नहीं कि एनडीए की यह सरकार जनता की कसौटी पर पूरी तरह खरी ही उतरे लेकिन एक काम तो हुआ कि कांग्रेस सरकार के तमाम पाप एक-एक कर सामने आने लगे।
Monday, 16 May 2016
पिछले साल २ दिसंबर को इंदौर के डकाच्या ग्राम में एक मासूम कार्तिक की अपहरण कर बड़ी बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी जिसके आरोप में उसी गांव में मेडिकल स्टोर चलाने वाले सुभाष पाटीदार और दो अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन कार्तिक के पिता अशोक को सुभाष पाटीदार के चाचा डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार पर भी कार्तिक के अपहरण और हत्या में शामिल होने का शक था, इसी जूनून में कल १५ मई २०१६ को अशोक ने डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार के क्लिनिक में घुसकर डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार के बेटे की हत्या कर दी और डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार को भी मरने की कोशिश की पर गांव वालो ने उसे पकड़ लिया और पकड़े जाने के बाद अशोक का कहना है कि उसने बदला ले लिया अब उसे जो भी सजा मिले उसे मंजूर है.
दोस्तों हम कहाँ जा रहे है,
क्या यह दर्दनाक और खौफनाक हादसा बदलते हुए समाज का दर्पण नहीं है ?
क्या यह हादसा हमे यह सोचने पर मजबूर नहीं करेगा कि हम कितने भौतिकतावादी हो गए है,
क्यों किसी को एक मासूम बच्चे में दौलत दिखाई देती है और उसका अपहरण और हत्या हो जाती है ?,
क्यों कोई भी उस दुखी परिवार को सम्हाल नहीं पाता है उन्हें सांत्वना नहीं दे पाता है ?
क्यों कार्तिक के पूरे परिवार ने गांव छोड़ दिया ?
क्यों बच्चे का पिता कानून पर भरोसा नहीं कर पाता है और खुद ही हथियार उठा लेता है ?
प्रश्न यही है दोस्तों कि क्यों हम खुद में इतने व्यस्त हो गए है कि हमे दूसरे के सुख दुःख से कोई सरोकार ही नहीं रहा ?
क्या हमारी संवेदनाएं मर चुकी है ?
क्या हम सिर्फ सोशल मीडिया पर प्रवचन देकर ही समाज के प्रति अपने दायित्व पूरे कर रहे है ?
सोचियेगा जरूर दोस्तों, कल कही ऐसे ही हादसे हमारे आसपास ना होने लगे, फिर क्या कीजियेगा ?
Thursday, 12 May 2016
क्या आदित्य सचदेवा को इंसाफ मिलेगा ???
बिहार में जे डी यू एमएलसी मनोरमा देवी के पुत्र रॉकी द्वारा गाड़ी ओवरटेक करने पर आदित्य सचदेवा की बेरहमी से हत्या क्र दी, पर क्या आदित्य सचदेवा और उनके परिवार को न्याय मिलेगा इसकी उम्मीद कम है क्यों ?
१. पुलिस रॉकी के पिता बिंदु यादव को गिरफ्तार करती है पर पुलिस रिमांड नहीं मांगती है.
२. पुलिस रॉकी को गिरफ्तार करती है पर पुलिस रिमांड नहीं मांगती है. न्यूज़ चैनल्स के लापरवाही दिखाने पर २ दिन की रिमांड ली जाती है.
३. रॉकी से बरामद पिस्टल को पुलिस अधिकारी हाथ से उठते है, एक सामान्य आदमी भी जानता है कि हथियारों को फॉरेंसिक जांच से पहले नंगे हाथो से नहीं छुआ जाता। क्या बिहार पुलिस साबुत मिटने की कोशिश कर रही है ?
४. आदित्य के पोस्ट-मॉर्टम के बाद उसके रक्तरंजित कपड़े मॉर्चुरी के बाहर छोड़ देती है, फॉरेंसिक विशेषज्ञ होने के नाते जानता हूँ कि हत्या के प्रकरण में कपड़े सील बंद कर जप्त किया जाना आवश्यक है फिर न्यूज़ चैनल्स पर खबर आने के बाद पुलिस ने कपड़े जप्त किये
५. जे डी यू एमएलसी मनोरमा देवी के घर पर छापा मारते समय अवैध शराब मिलती है और यह भी स्पष्ट था कि मनोरमा देवी के द्वारा ही रॉकी को भगाया गया तब भी उन्हें फरार होने का मौका दिया
यह सब तथ्य ध्यान से दरखे जाए तो स्पष्ट हो जाता है कि गया पुलिस मनोरमदेवी और उनके हत्यारे पुत्र रॉकी को बचाने के लिए बिहार सरकार के दबाव में है और अब तो हम सब को ही आदित्य और उसके परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ाई लड़ने की जरूरत है
Monday, 9 May 2016
दिल्ली की जनता ने भी किस नटया को अपना मुख्यमंत्री चुन लिया है, नटया भी ऐसा जैसा नाटकों में भांड होता है, कसम से तरस आता है दिल्ली की जनता की बुद्धि पर, अरे भैय्ये केजरी तुम्हे जनता ने दिल्ली की सेवा करने के लिए चुना है, मोदीजी की डिग्री के मामले में बहुत स्पष्ट नज़र आता है कि अगस्ता वेस्टलैंड डील से ध्यान हटाने के लिए युगपुरुष ने पूरा नाटक रचा पर वह यह भूल गए कि " रिश्ते में तो मोदीजी युगपुरुष के बाप लगते है और नाम है शहंशाह " आज मोदीजी ने युगपुरुष के कपड़े सार्वजनिक तौर पर उतरवा कर पूरा ही नंगा करदिया
आखिर मोदीजी ने वही किया जैसा मैंने लिखा था , अमित शाह के हाथो अपनी डिग्री सार्वजनिक करवा दी अब केजरीवाल & कम्पनी कितना भी चीखे चिल्लाए , आखिर में मोदीजी ने उन्हें----------- साबित कर ही दिया, क्या कहते है " खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे " हा हा हा, ऊपर से आर टी आई से यह राज भी खुल गया कि केजरीवाल ने एग्जाम देकर आई आई टी में प्रवेश नहीं लिया था उन्हें तो स्टाफ कोटे से आई आई टी खरगपुर में प्रवेश मिला था क्या कहते है "जिनके घर शीशे के होते है वो दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकते है " हा हा हा
Friday, 6 May 2016
मोदीजी उनकी शैक्षणिक योग्यता के मामले में जिस तरह केजरीवाल & कम्पनी तपा रहे है उसे देखकर लग रहा है कि जब वास्तविकता बाहर आएगी ये केजरीवाल & कम्पनी किसी को मुहं दिखने लायक भी नहीं रहेगी। इन मूर्खो को ये भी समझ में नहीं आ रहा है कि जिस आदमी ने एम ए प्रथम श्रेणी से की होगी उसने बी ए तो पास की ही होगी पर मूर्खो को कौन समझा सकता है अभी तो मोदीजी के खेल का आनंद लेने का समय है
कल पूरे मध्यप्रदेश के कई जिलों में आंधी तूफान आया और कई जगह जन धन हानि हुयी है खास तौर पर उज्जैन में सिंहस्थ में १०० से अधिक तम्बू गिरने की वजह से ७ लोगो की मौत हो गई और लगभग १०० घायल हो गए,जब भी बात प्राकर्तिक असंतुलन की होती है चाहे सूखा पड़े, कुए सुख जाये,आंधी तूफान आये,बाढ़ आ जाये हम सब सरकार को कोसने बैठ जाते है,पर हम यह भूल जाते है कि जिम्मेदारी सरकार की ही नहीं हम सबकी भी है, हम सब अपनी आत्मा को साक्षी मानकर यह भी सोच कर देख ले कि हममें से कितने लोगो ने प्रकृति को संतुलित रखने में योगदान दिया है और हमारे कितने कृत्य प्रकृति को बर्बाद करने में शामिल रहे, सरकार तो बाद में आती है सिर्फ सरकार को कोसने से कुछ नहीं होगा, आइये हम सब मिलकर प्रकृति की रक्षा करने में और संतुलन बनाने में अपना अपना योगदान दे, कहते है ना कि आसमान में भी छेद होता है यारो एक पत्थर तो दिल से उछालो
Saturday, 23 April 2016
कल न्यूज़ चैनल्स पर हरियाणा में आरक्षण के लिए जाटो द्वारा किये जा रहे आंदोलन के दौरान की वीडियो फुटेज दिखाई गई जिन्हे देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए , वीडियो फुटेज में आंदोलनकारी जाट ट्रेक्टर ट्रॉली में साजो सामान के साथ आते हुए दिखाई देते है वो केंद्र सरकार में मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर पर किसी केमिकल का स्प्रे करते है और उनके मकान में योजनाबद्ध तरीके से आग लगाते हुए दिखाई दे रहे है, इतना ही नहीं आग लगाने के बाद वो मिठाई बांटते और खाते हुये ( मिठाई साथ में लेकर आये थे ) दिख रहे है और हंस रहे है , कुछ ही देर में वहां रखी कार में विस्फोट होता है और घर के भीतर से महिलाएं और बच्चे भागते हुये दिखाई दे रहे है और उनके पीछे भीड़ पीछा करती हुयी दिख रही है और वो लोग कैसे भी जान बचा कर भाग जाते है (अगर कार में विस्फोट नहीं होता तो ये जाट उन्हें जलते हुये घर से बाहर नहीं निकलने देते ). इतना ही नहीं घर के भीतर से पुलिस को ३० बार फोन लगाया गया पर वह नहीं आई। सच में कल का वीडियो फुटेज देखने के बाद हरियाणा के जाटो के लिए मन में जो बचा खुचा सम्मान था वह भी नहीं बचा, क्या हम अपनी मांगे मनवाने के लिए हैवानियत की हद उतर कर दरिंदे बन सकते है इन जाटो को देखकर तो यही लगा कि ये आरक्षण की मांग मनवाने के लिए हैवान ही बन गए थे. अपनी मांगे मनवाने की आड़ में इतने घिनौने और हैवान मत बनो कि लोग आपकी जाति सुनकर ही घृणा करने लगा. शर्मनाक
Monday, 18 April 2016
कश्मीर में हंदेवाडा में जिस तरह षड्यंत्रपूर्वक सेना को लड़की के साथ छेड़खानी के झूठे आरोप में फंसा कर बदनाम करने की कोशिश पाकिस्तान और आतंकवाद समर्थित लोगो द्वारा की गई जिसके बाद हुयी हिंसा में ४ लोग मारे गए और अब जब लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान देकर स्थिति स्पष्ट कर दी है कि उसके साथ दो स्थानीय युवको ने छेड़खानी की थी तो अब ऐसे नापाक तत्वों पर सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए जिससे भविष्य में कोई ऐसी नापाक और षड्यंत्रकारी हरकत ना कर सके और साथ में उन न्यूज़ चैनल्स पर भी कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने बगैर जांच किये सेना को दोषी ठहराया था और इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि हमारी सेना कश्मीर में देश की पाकिस्तानी आतंकवादियों और देशद्रोहियो से रक्षा करने के लिए है और हम सबको अपनी सेना पर गर्व होना चाहिए. जयहिन्द जयहिंद की सेना जयहिंद
Saturday, 16 April 2016
अशोकनगर जिले में मेरे गांव में जबसे इस वर्ष गेहूं और चना की फसल के लिए बोर कर पानी देना शुरू किया उसके बाद पिछले ३ माह से गांव के भीतर के सारे कुएं और हैंडपंप जलस्तर कम होने की वजह से सुख गए है और यह पिछले ५० वर्षो में पहली बार हुआ है, पर हम एक गांव की ही क्यों बात करें बुंदेलखंड के अधिकतर गांवों,कस्बों और शहरो में यही हालात है और अकेले बुंदेलखंड की ही क्यों बात करें पुरे भारत देश में ९ राज्य सूखे से प्रभावित है, महाराष्ट्र के हालात तो सबके सामने है वहां तो पानी के टेंकर लूटे जा रहे है और कई स्थानों पर १४४ धारा लगनी पड़ी है, पुरे विश्व में दिन और रात के तापमान में वृद्धि हो चुकी है इतना ही नहीं वर्ष में गर्म दिनों की संख्या में भी इजाफा हुआ है दूसरी तरफ जापान में भूकम्प आ गया है और सुनामी के खतरे के संकेत हो चुके है, कुछ दिनों पहले इंग्लैंड के कुछ शहरो में इतनी बारिश हुयी कि सड़कों पर कई फ़ीट पानी भर गया, ये सब हमे यही संकेत दे रहे है कि मनुष्य ने प्रकृति के साथ इतना खिलवाड़ कर दिया है कि प्राकर्तिक असतुंलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है और वह दिन दूर नहीं जब हम पानी,अनाज और दलहनों के लिए तरस रहे होंगे और प्रकृति इन्हे देने से हमे मना कर देगी अभी भी वक्त है आइये हम प्रकृति को बचाने के लिए शपथ ले और हाथ से हाथ मिलाकर इस अभियान में जुट जाये अन्यथा ?????
Tuesday, 12 April 2016
पिताजी के निधन के बाद मैंने इस वर्ष खेत के कुछ हिस्से में अलसी लगवाई, अलसी पहले बोई जाती थी पर पिछले २५ वर्षो से बुंदेलखंड क्षेत्र में इसका प्रचलन कम हो चुका है पर आश्चर्यजनक रूप से अच्छी और उच्च गुणवत्ता की अलसी पैदा हुयी जिसे देखने के बाद मेरे गांव के कई किसानों ने अगले वर्ष से अलसी लगाने का निर्णय लिया है, वैसे सभी को जानकारी होगी कि अलसी ह्रदय के लिए बड़ी ही लाभकारी है ये तो पुरातन खेती की और मेरा पहला कदम था अभी तो खेती की प्रक्रिया को सुधारने की लड़ाई बहुत लम्बी है पर जैसा कहते है कि पहले कदम पर सफलता मिले तो जोश दुगना हो जाता है उम्मीद करता हूँ कि अपने गांव और आसपास के क्षेत्रो में किसानों को जैविक,प्राकर्तिक और पुरातन खेती की और मोड़ने में कुछ हद तक सफल हो पाऊ यही ईश्वर से प्रार्थना
Tuesday, 5 April 2016
अभी तक लोगो को जावेद मियांदाद द्वारा भारत के विरुद्ध १९८६ में चेतन शर्मा की गेंद पर छक्का मारकर पाकिस्तान को दिलाई जीत याद थी, २००७ में टी ट्वेंटी विश्व कप में युवराज सिंह के द्वारा स्टुअर्ट ब्रॉड की ६ गेंदों पर ६ छक्के याद थे , महेंद्र सिंह धोनी द्वारा २०११ के विश्व कप के फाइनल में छक्के से दिलाई जीत याद थी पर वेस्टइंडीज के कार्लोस ब्रेथवेट ने ३ अप्रैल २०१६ को टी ट्वेंटी के फाइनल में बेन स्टोक्स के आखिरी ओवर की पहली चार गेंदों पर ४ छक्के लगाकर वेस्टइंडीज को जिस अंदाज़ में जीत दिलाई वो अब लोगो के दिलो में हमेशा रहेगा
Saturday, 2 April 2016
zero budget खेती का फार्मूला हर किसान तक पहुंचाये । । Rajiv Dixit
मित्रो इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी की पूरे देश का पेट भरने वाला किसान खुद भूख से मरता है आत्मह्त्या करता है ! उसके घर की छत टपकती है फिर भी वो बारिश का इंतजार करता है ! हर वर्ष हमारे देश मे 70 हजार किसान आत्महत्या कर रहे है लेकिन हमारे कृषि प्रधान देश मे ऐसा क्यों हो रहा है ?? और इसका समाधान क्या है ?? इस पोस्ट के माध्यम से हम इस समस्या का मूल कारण और समाधान की बात करेंगे !
देश मे किसानो की आत्महत्या के पीछे का सबसे कारण ये है की प्रतिदिन उनकी खेती का खर्चा बढ़ता जा रहा है और आमदनी कम होती जा रही है जिससे किसान कर्जे मे डूब रहा है और आत्महत्या कर रहा है ! खेती करने के लिए किसान अपने खेत रसायानिक खाद और कीटनाशक डाल रहा है !!
जिसको यूरिया,DAP,superphosphate,कहते है और कीटनाशको को एंडोसल्फान ,मेलाथ्यान आदि कहते है ! तो ये विदेशी कंपनियो के कीटनाशक और रासायनिक खाद किसानो के बीच मे सबसे ज्यादा खरीदे जाते है और हर साल 4 लाख 80 हजार करोड़ रूपये ये कंपनियाँ हमारे देश के किसानो से लूटती है ! 4 लाख 80 हजार करोड़ को 100 करोड़ की जनता मे कैश बांटे तो प्रति व्यकित 4800 रूपये आएंगे सोचो कितनी बड़ी लूट होती है रासायनिक खाद और कीटनाशक से !
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राजीव भाई ने 12 साल कर्नाटक ,महाराष्ट्र मे हजारो किसानो के साथ काम किया और उन किसानो ने राजीव भाई के कहने पर यूरिया DAP छोड़ कर गोबर का खाद डालना शुरू किया ! और जिन किसानो के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 20 से 25 मीट्रिक टन गन्ना होता था आज उस किसान के खेत मे एक एकड़ मे 90 से 100 टन गन्ना होता है !
जिन किसानो के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 12 क्विंटल गेहूं होता था आज उस किसान के खेत मे गोबर की खाद डालने से एक एकड़ मे 20 से 22 क्विंटल तक गेहूं होता है !
जिस किसान के यूरिया DAP वाले खेत मे पहले एक एकड़ मे 3 कवींटल कपास होती है आज उस किसान के खेत मे गोबर की खाद डालने से एक एकड़ मे 7 क्विंटल कपास होती है !
ऐसे एक नहीं हजारो किसान है महाराष्ट्र मे ,कर्नाटक मे और थोड़ा आगे जाओ छतीसगढ़ मे जिनहोने अपने खेतो मे यूरिया DAP छोड़कर गोबर की खाद डालना शुरू किया ! गोबर का खाद डालने से उत्पादन ज्यादा होता यूरिया DAP की तुलना मे !
गोबर की खाद से क्यों उत्पादन ज्यादा होता है ?? उसे जानना बहुत जरूरी है ये बात आप समझ जाए भारत का हर किसान समझ जाए पूरा भारत दुबारा खुशहाल हो जाएगा !
गोबर की खाद जब हम खेत मे डालते है तो होता क्या है ?? दरअसल गोबर जो है वो बहुत तरह के जीव जन्तुओ का भोजन है और यूरिया भोजन नहीं जहर है आपके खेत मे एक जीव होता है जिसे केंचुआ कहते हैं केंचुआ को कभी पकड़ना और उसके ऊपर थोड़ा यूरिया डाल देना आप देखोगे केंचुआ तरफना शुरू हो जाएगा और तुरंत मर जाएगा ! जब हम टनों टन यूरिया खेत मे डालते है करोड़ो केंचुए मार डाले हमने यूरिया डाल डाल के !!
केंचुआ करता क्या है ?? केंचुए मिट्टी को नरम बनाते है पोला बनाते है उपजाऊ बनाते हैं केंचुए का कम क्या है ?? ऊपर से नीचे जाना ,नीचे से ऊपर आना पूरे दिन मे तीन चार चक्कर वो ऊपर से नीचे ,नीचे से ऊपर लगा देता है ! अब जब केंचुआ नीचे जाता तो एक रास्ता बनाते हुए जाता है और जब फिर ऊपर आता है तो फिर एक रास्ता बनाते हुए ऊपर आता है ! तो इसका परिणाम ये होता है की ये छोटे छोटे छिद्र जब केंचुआ तैयार कर देता है तो बारिश का पानी एक एक बूंद इन छिद्रो से होते हुए तल मे जमा हो जाता है !
मतलब water recharging का काम पूरी दुनिया मे कोई करता है तो वो केंचुआ है जो यूरिया के कारण मर जाता है इसलिए यूरिया डालना मतलब किसान के लिए आत्मह्त्या करने के बराबर है ! जिस किसान के खेत मे यूरिया डालेगा तो केंचुआ मर जाएगा केंचुआ मर गया तो मिट्टी मे ऊपर नीचे कोई जाएगा नहीं तो मिट्टी कठोर होती जाएगी कड़क होती जाएगी मिट्टी और रोटी के बारे एक बात कही जाती है की इन्हे फेरते रहो नहीं तो खत्म हो जाती है रोटी को फेरना बंद किया तो जल जाती है मिट्टी को फेरना बंद करो पत्थर जैसी हो जाती है !
मिट्टी को फेरने का मतलब समझते है ?? ऊपर की मिट्टी नीचे ! नीचे की ऊपर !ऊपर की नीचे ,नीचे की ऊपर ये केंचुआ ही करता है ! केंचुआ किसान का सबसे बड़ा दोस्त है ! एक केंचुआ साल भर जिंदा रहे तो एक वर्ष मे 36 मीट्रिक टन मिट्टी को उल्ट पलट कर देता है और उतनी ही मिट्टी को ट्रैक्टर से उल्ट पलट करना पड़े तो सौ लीटर डीजल लग जाता है 100 लीटर डीजल 4800 का है ! मतलब एक केंचुआ एक किसान का 4800 रूपये बचा रहा है ऐसे करोड़ो केंचुए है सोचो कितना लाभ हो रहा है इस देश को !
इसलिए गोबर खाद डालने से फाइदा क्या होता है ? रसायनिक खाद डालो केंचुआ मर जाता है गोबर का खाद डालो केंचुआ ज़िंदा हो जाता है क्योंकि गोबर केंचुए का भोजन है केंचुए को भोजन मिले वह अपनी जन संख्या बढ़ाता है और इतनी तेज बढ़ाता है की कोई नहीं बढ़ा सकता भारत सरकार कहती है हम दो हमारे दो ! केंचुआ नहीं मानता इसको !एक एक केंचुआ 50 50 हजार बच्चे पैदा करके मरता है एक प्रजाति का केंचुआ तो 1 लाख बच्चे पैदा करता है ! तो वो एक ज़िंदा है तो उसने एक लाख पैदा कर दिये अब वो एक एक लाख आगे एक एक लाख पैदा करेंगे करोड़ो केंचुए हो जाएंगे अगर गोबर डालना शुरू किया !!
ज्यादा केंचुआ होंगे तो ज्यादा मिट्टी उलट पलट होगी तो फिर छिद्र भी ज्यादा होंगे तो बारिश का सारा पानी मिट्टी मे धरती मे चला जाएगा ! पानी मिट्टी मे चला गया तो फालतू पानी नदियो मे नहीं जाएगा ,नदियो मे फालतू पानी नहीं गया तो बाढ़ नहीं आएगी तो समुद्र मे फालतू पानी नहीं जाएगा इस देश का करोड़ो करोड़ो रूपये का फाइदा हो जाएगा !! इसलिए आप किसानो को समझाओ की भाई गोबर की खाद डालो एक ग्राम भी उत्पादन कम नहीं होगा !!
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लेकिन गोबर की खाद डालने का तरीका क्या है वो आप जान लो !!
अभी किसान क्या करता है कचड़ा डालने वाले घूरे मे गोबर जमा कर देता है वो साल भर सूखता रहता है उसकी पूरी ताकत निकल जाती वो कोई लाभ नहीं देता ! तो गोबर को हमेशा गीला डालना चाहिए ताजा डालना चाहिए !! आप ये फार्मूला लिख लो एक एकड़ खेत के हिसाब से !!
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जैविक खेती का एक आसान तरीका.
जैविक खाद ( एक एकड़ खेत के लिए ) कैसे बनाये !
एक पलास्टिक के ड्रम में नीचे लिखी पाँच चीजों को आपस में मिला लें.
10 किलो गोबर ( देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
10 लीटर मूत्र (देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
1 किलो गुड़ ( कैसा भी चलेगा, जो सड़ गया हो आपके उपयोग का ना हो तो वो ज्यादा अच्छा है )
अब इसमे 1 किलो पिसी हुई दाल या चोकर (कैसा भी चलेगा, आपके उपयोग का ना हो तो ज्यादा अच्छा )
और अंत मे डालनी है 1 किलो मिट्टी किसी भी पुराने पेड़ के नीचे की पीपल, बरगद …. (पीपल ,बरगद के पेड़ 24 घंटे आक्सीजन छोड़ते है ! जिससे जीवाणुओ की संख्या ज्यादा होगी यही जीवाणु खेत को चाहिए !!
इन पांचों को आपस मे मिला दो हाथ से या किसी डंडे से ! मिलाने मे तकलीफ आए तो थोड़ा पानी डाल दो पानी थोड़ा सा ही डालना है !! अब इसे 15 दिन तक छाँव में रखो,पेड़ की छाँव के नीचे ज्यादा बढ़िया ! धूप मे बिलकुल मत रखना !और रोज सुबह शाम एक बार इसे मिला दो. 15 दिन बाद ये खाद बन कर तैयार हो जाएगी इस खाद करोड़ो करोड़ो सूक्ष्म जीवाणु होगी वो हमने जो मिट्टी डाली ना उसी के जीवाणु अपनी संख्या बढ़ाएँगे ! जिस दिन मिट्टी डाल कर रखा था अगर उस दिन 1 लाख जीवाणु है तो 15 दिन बाद इनकी संख्या 100 करोड़ को पार कर जाएगी !!
अब इस खाद (जीवाणु घोल ) को खेत मे डालना है और डालने से पहले इसमे पानी मिलना है पानी कितना मिलना है जितना गोबर था उसका 10 गुना पानी ! 10 किलो गोबर था तो 100 लीटर पानी !! तो पानी मिलाने के बाद ये पूरा घोल तैयार हो जाता है और इसे बस अब एक एकड़ के खेत मे छिड़कना है ! जैसे मिट्टी दबाने के लिए हम पानी छिड़कते है वैसे छिड़कना है !
आप इसे छिड़क देंगे तो ये जीवाणु मिट्टी मे मिल जाएंगे और मिट्टी मे सारा खेल खेलने का काम ये जीवाणु ही करते हैं ! आपको पता है ये जीवाणु क्या कम करते है ?
पोधे की जड़ को नाइट्रोजन चाहिए तो ये जीवाणु उपलब्ध करवाते है !
पोधे की जड़ को कैल्शियम चाहिए तो ये जीवाणु उपलब्ध करवाते है !
पोधे की जड़ को आइरन चाहिए तो ये जीवाणु उपलब्ध करवाते है !
अर्थात पोधे को जितने सूक्ष्म तत्व चाहिए और पोधे के फल से होते हुए हमारे शरीर को भी चाहिए तो ये जीवाणु ही उपलब्ध करवाते हैं ! तो जिस पोधे को जीवाणु ज्यादा मिलेंगे तो उसकी बढ़त ज्यादा होगी बढ़त ज्यादा होगी तो फल ज्यादा होगा फल ज्यादा होगा तो उत्पादन ज्यादा होगा !
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अब समय लिख लो इसको कितनी बार कैसे कैसे डालना है ! सब्से अच्छा तरीका है की बीज डालने से पहले जब आप खेत की जुताई करे ठीक उसके अगले दिन डाल दीजिये !! फिर बीज बो दिये जिये और बीज बोने के 21 दिन बाद फिर डाल दो ! आप मोटी सी बात याद रखो हर 21 दिन बाद डाल दो !! मान लो एक फसल 4 महीने की है तो 5 बार डालना पड़ेगा !!
इसको छिड़कने की कुल 4 विधि है !!
1) पहली ये की सीधे डब्बा लो भरो और छिड़क दो !! भरो और छिड़क दो !!
अब आप कहोगे खेत बड़ा है तो क्या करे !
तो दूसरा तारीक है खेत मे पानी लागाते है तो पानी मे डाल दो नाली मे से पानी जा रहा है एक टंकी मे इसको भरकर टूटी खोल दो टपक टपक पानी के साथ चला जाएगा
तीसरा तरीका ये है अगर आपके पास जानवरो की संख्या ज्यादा है तो गोबर ज्यादा होगा थोड़ा गोबर तो खाद बनाने मे काम आ गया बाकी गोबर का क्या करोगे तो बाकी गोबर अगर सूखा हुआ है तो उसे भी 15 दिन बाद 200 लीटर पानी के साथ इसी ड्रम मे डाल दो फिर उस गोबर के लड्डू बना लो खेत मे छिड़क दो !
एक और तरीका है खेत की मिट्टी खोद लो मिट्टी मे ये पूरा घोल मिला दो मिट्टी गीली हो गई इसके लड्डू बना खेत मे छिड़क दो !!
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अब अगर जानवर घर के है तो गोबर ,गौ मूत्र फोकट का ! गुड़ वो लेना है जो
बिलकुल सड़ा हुआ हो जिसे जानवर भी ना खाये पानी तो पहले से फोकट का है कुछ दाल आदि लेने का खर्चा करना पड़ेगा वो भी अगर किसान दाल की खेती करता है तो वो भी मिल जाएगी तो कुल मिलाकर खाद बनाने का खर्चा शून्य हो जाएगा !! मेहनत लगेगी लेकिन पूंजी मे पैसा कम से कम खर्च होगा !!
और ये खाद जो तैयार होगी उसमे जबर्दस्त कवालेटी quality है क्यों इसमे कैल्शियम भरपूर ,आइरन भरपूर ,माइग्निशियम भरपूर , और ऐसे 18 पोषक तत्व है जो मिट्टी को चाहिए वही लेकिन यूरिया मे नहीं है DAP मे ये नहीं है यूरिया मे कैल्शियम नहीं है DAP मे कैल्शियम नहीं है
कैल्शियम सबसे मुख्य आधार है मिट्टी के लिए क्योंकि खेत मे कैल्शियम होगा तो पोधें मे होगा ,पोधे मे होगा तो फल मे होगा ,फल मे होगा तो हमारे भोजन मे होगा
हमारे भोजन मे होगा तो शरीर मे होगा शरीर मे होगा तो हड्डियाँ मजबूत हड्डियाँ मजबूत तो शरीर मजबूत तो ये सारा साइकिल गोबर की खाद से ही मिलेगा यूरिया DAP से तो मिलने वाला ही नहीं है ! तो आप किसानो को ये समझाएँ की गोबर का खाद डालें भरपूर उत्पादन होगा खर्चा शून्य आएगा !! अगर पहले वर्ष थोड़ा उत्पादन कम भी हुआ तो तो खाद जो मे खर्चा शून्य हुआ तो वो बराबर हिसाब बैठेगा क्यों यूरिया की खाद के लिए हजारो हजारो रुपए खर्च करने पड़ते है !! और हर साल उत्पादन बढ़ता जाएगा ! 10 -12 साल बाद तो 100 % की बढ़ोतरी हो जाती है !! दोगुना लाभ ! बस हमेशा एक बात याद रखे जो गोबर लेना है वो देशी गाय का ही होना चाहिए ! विदेशी जर्सी गाय वाले से लाभ नहीं मिलेगा
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अब फसल को कभी कीड़ा लग जाए तो उसका फार्मूला भी लिख लीजिये वैसे फसल को कीड़ा यूरिया DAP से आदि डालने से ही ज्यादा लगता है !!
जैविक जंतु नाशक ( एक एकड़ खेत के लिए )
एक ड्रम में नीचे लिखी चीजों को मिला कर उबालें !
20 लीटर मूत्र ( गाय का, बैल का, या भैंस का )
2 से 3 किलो नीम के पत्ते या निम्बोली पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो सीताफल के पत्ते पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो आकड़ा ( आक, अकौवा, अर्क मदार ) के पत्ते को पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो धतुरे के पत्ते को पिस कर मिलाएं !
2 से 3 किलो बेल पत्र के पत्ते को पिस कर मिलाएं !
और इसमे खूब लाल तीखी मिर्च डाल दो 300 -400 ग्राम ! आधा किलो लहसुन डाल दो ! और एक मोटी सी बात याद रखे जिन जिन पत्तों को गाय नहीं खाते और आपके गाँव मे उपलब्ध है वो सब इसमे डाल दो !!
अब इस घोल को 20 लीटर देशी गाय के मूत्र मे डाल कर उबाले ! खूब उबल जाये तो इसे ठंढा करके छान लें ! अब इसे बोतल में या किसी और बर्तन में रख लें !
# अब जब भी इसका इस्तेमाल करना हो तो इसमें 200 लीटर पानी मिला कर किसी भी फसल पर छिड़के !
छिड़कने के दिन के अंदर सभी कीट मर जायेंगे ! एक भी पैसे का खर्चा नहीं होगा बाजार से कुछ नहीं लाना पड़ता !!
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तो मित्रो ये फार्मूला अगर आप भारत के एक एक किसान तक पहुंचा दें तो इस देश का 4 लाख 80 हजार करोड़ विदेश जाने से बच जाएगा !! लाखो किसानो का उत्पादन खर्च कम हो जाएगा ! उनकी आय बड़ जाएगी उनको कर्ज नहीं लेना पड़ेगा ! लाखो किसान आत्मह्त्या करने से बच जाएंगे ! और जहीरले चावल ,गेहूं ,चना फल हम नहीं खाएँगे तो हम ग्ंभ्रीर बीमारियो से बचेंगे ! लाखो करोड़ हर वर्ष जो दवा कंपनियाँ लूट रही वो बच जाएगा !! इसलिए मित्रो अधिक से अधिक इस zero budget farming फार्मूले को share करें ! इसकी फोटो कपियाँ करवा गाँव- गाँव बांटे !
अमर बलिदानी राजीव दीक्षित जी की जय !!
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वन्देमातरम !!
इस फार्मूले से खेती करने मे कोई समस्या आए तो इस नंबर पर संपर्क करें !
अमित आनंद,08090012349
माधवराव 09866548278
सचिन शिंदे 09922419334
अजीब देश है हमारा, हिन्दू देवी देवताओ पर अनर्गल टिपण्णी करते रहो कुछ नहीं होगा, हिन्दू साधु संतो पर अमर्यादित टिपण्णी करते रहो कुछ नहीं होगा पर ऋतिक रोशन कही पोप का नाम ले ले तो नोटिस जारी हो जाता है वाह रे मेरे देशवासियो जय हो
अगर कोई गम्भीर मरीज़ अस्पताल में मर जाये तो चिकित्सक जिम्मेदार और चिकित्सक निलम्बित और अगर कोलकत्ता में फ्लाईओवर गिर जाये और २४ लोग मर जाये और १०० से अधिक घायल हो जाये तो मंत्री,प्रमुख सचिव, मुख्य यंत्री, अधीक्षण यंत्री,कार्यकारी यंत्री,सहायक यंत्री, निर्माणकर्ता कम्पनी और कांट्रेक्टर में से कोई भी जिम्मेदार नहीं और तो और निर्माण करने वाली कपनी का कहना है कि भगवान की मर्जी थी इसलिए गिर गया , वाह क्या तर्क है धन्य हो. मतलब केस भगवान के खिलाफ दर्ज होना चाहिए हा हा हा, मरने वालो और घायलों को मुआवजा घोषित कर पश्चिम बंगाल सरकार ने खानापूर्ति कर दी. अजीब किन्तु सत्य। जरा सोचिये If serious patient died in hospital doctors will be responsible and got suspended. Fly over collapsed 24 died 100 injured but principle secretary chief engineer superintendent engineer executive engineer assistant engineer contractor politicians are not responsible only compensation announced to those who died or injured. Very strange but true. Just think
Wednesday, 30 March 2016
पिछले २-३ दिन से प्रवचन देने का ट्रेंड सोशल मीडिया (फेसबुक,ट्वीटर ) पर चल रहा है और प्रवचनकारी संत लोग कोई और नहीं खाजदीप सरदेसाई,पागरिका घोष,बुरखा दत्त, राहुल संवल ,खबीश कुमार और पाप प्रसन्न बाजपेयी जैसे बुद्धिजीवी महापुरुष है जो डॉ पंकज नारंग की हत्या के मामले को साम्प्रदायिक रंग नहीं देने का प्रवचन दे रहे है और पुलिस से भड़काऊ खबरों पर कार्यवाही के लिए निवेदन कर रहे है,बिलकुल सही बात है कि देश में लोगो के बीच वैमनसयता, तनाव नहीं बढ़ना चाहिए पर ये तो देखो कि प्रवचनकर्ता है कौन,वही लोग जिन पर नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली की कहावत पूरी तरह फिट बैठती है,भैय्ये आप लोगो के ये ख़याल तब कहाँ गए थे जब दादरी और हैदराबाद की घटनाओं को आपने साम्प्रदायिक और जातिवादी रंग देकर देश को तोड़ने की कोशिश की थी,लोगो को आपस में लड़ाने की कोशिश की थी तब क्या आपकी बुद्धि घास चरने गई थी तो आज क्यों बिलबिला रहे हो और लोग जिसकी मांग कर रहे है वह है गैरक़ानूनी रूप से रह रहे लोगो पर कार्यवाही की तो आपके पेट में दर्द क्यों हो रहा है. यही सब देखकर तो लगता है कि आप लोगो की नीयत में खोट है वर्ना देश में सदभाव रहे लोग आपस में मिलजुल कर रहे ऐसा कौन नहीं चाहता.जयहिन्द
रोहित वेमुला दलित नहीं थे ? रोहित वेमुला वडेरा वर्ग के थे जो दलित वर्ग में नहीं आता ये स्टेटमेंट तेलंगाना के गृहमंत्री नयनी नरसिम्हा रेड्डी ने विधानसभा में दिया है तो फिर प्रश्न उठता है कि रोहित वेमुला ने जो दलित का सर्टिफिकेट बनवाया था वो फर्जी था और उसे किस अधिकारी ने बनाया था इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और अगर यह बात सही निकलती है कि फर्जी प्रमाणपत्र था तो फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले अधिकारियो पर केस दर्ज कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए अब क्या राजदीप,बरखा,सागरिका,पूण्य प्रसून,अभिसार,शेखर गुप्ता,अजय कुमार माफ़ी मांगेगे???