Monday, 16 May 2016

पिछले साल २ दिसंबर को इंदौर के डकाच्या ग्राम में एक मासूम कार्तिक की अपहरण कर बड़ी बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी जिसके आरोप में उसी गांव में मेडिकल स्टोर चलाने वाले सुभाष पाटीदार और दो अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन कार्तिक के पिता अशोक को सुभाष पाटीदार के चाचा डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार पर भी कार्तिक के अपहरण और हत्या में शामिल होने का शक था, इसी जूनून में कल १५ मई २०१६ को अशोक ने डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार के क्लिनिक में घुसकर डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार के बेटे की हत्या कर दी और डॉ कैलाश चन्द्र पाटीदार को भी मरने की कोशिश की पर गांव वालो ने उसे पकड़ लिया और पकड़े जाने के बाद अशोक का कहना है कि उसने बदला ले लिया अब उसे जो भी सजा मिले उसे मंजूर है.
दोस्तों हम कहाँ जा रहे है,
 क्या यह दर्दनाक और खौफनाक हादसा बदलते हुए समाज का दर्पण नहीं है ?
क्या यह हादसा हमे यह सोचने पर मजबूर नहीं करेगा कि हम कितने भौतिकतावादी हो गए है,
क्यों किसी को एक मासूम बच्चे में दौलत दिखाई देती है और उसका अपहरण और हत्या हो जाती है ?,
क्यों कोई भी उस दुखी परिवार को सम्हाल नहीं पाता है उन्हें सांत्वना नहीं दे पाता है ?
क्यों कार्तिक के पूरे परिवार ने गांव छोड़ दिया ?
क्यों बच्चे का पिता कानून पर भरोसा नहीं कर पाता है और खुद ही हथियार उठा लेता है ?
प्रश्न यही है दोस्तों कि क्यों हम खुद में इतने व्यस्त हो गए है कि हमे दूसरे के सुख दुःख से कोई सरोकार ही नहीं रहा ?
क्या हमारी संवेदनाएं मर चुकी है ?
क्या हम सिर्फ सोशल मीडिया पर प्रवचन देकर ही समाज के प्रति अपने दायित्व पूरे कर रहे है ?
सोचियेगा जरूर दोस्तों, कल कही ऐसे ही हादसे हमारे आसपास ना होने लगे, फिर क्या कीजियेगा ?  

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