भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद ( ICMR) ने अपने अध्ययन में पाया है कि वर्तमान में भारत देश में कैंसर के कुल 14 लाख ३० हजार मरीज है जिनमेंसे लगभग ७ लाख की २०१६ में ही मृत्यु हो जाएगी इन कैंसर के मरीजों मे अधिकतर ब्रैस्ट,फेफड़ों और बच्चेदानी के कैंसर के है और इन १४ लाख ३० हज़ार केसो में से लगभग ३ लाख ७० हज़ार मरीज सिर्फ पंजाब में है ( ज्ञात रहे कि खेती के लिए पेस्टिसाइड का अधिकतम उपयोग पंजाब में ही होता है) और पंजाब में एक ट्रेन का नाम ही कैंसर एक्सप्रेस है जो मरीजों को चंडीगढ़ ले जाती है कैंसर की बीमारी जितनी दर्दनाक है उतना ही तकलीफदेह उसका इलाज भी है और कैंसर का इलाज भी बहुत महंगा है जिसे करने में परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ जाती है और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद ( ICMR) ने अपने अध्ययन में यह भी पाया है कि वर्ष २०२० तक कैंसर के मरीजों की संख्या में १७ लाख ३० हजार का इजाफा और हो जायेगा, कैंसर होने के दो मुख्य कारण तम्बाकू का सेवन और पेस्टिसाइड है, रही बात पेस्टिसाइड की तो हम किस चीज़ में पेस्टिसाइड नहीं खा रहे है, अनाज ( गेहूं,मक्का,चावल,बाजरा ), दाले (चना,मसूर,अरहर,मूंग उड़द ), सब्जियां,फल,दूध सभी में तो पेस्टिसाइड (कीटनाशक ) है और क्यों ना हो हमारे देश के अधिकतर हिस्से में खेती करने के कीटनाशकों अर्थात पेस्टिसाइड का भरपूर उपयोग हो रहा है फफूंद के लिए कीटनाशक, कीड़ों के लिए कीटनाशक, इल्ली के लिए कीटनाशक,फसलों में होने वाले कचरे के लिए कीटनाशक, अगर यू ही हम कीटनाशकों का प्रयोग करते रहे तो विश्वास मानिये छोटी उम्र में ही कैंसर होने लगेगा, और इस पर अगर हमे रोक लगानी है तो हमे तम्बाकू के सेवन पर रोक लगनी होगी और हमे अपनी पुरातन जैविक और प्राकर्तिक खेती की और लौटना होगा क्यूंकि इसी तरीके से हम अपने खानपान में पेस्टिसाइड की मात्र कम कर पाएंगे और कैंसर के बढ़ते हुये खतरे पर रोक लगा पाएंगे अन्यथा
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