वाकई एक सारगर्भित पढने और गुनने लायक पोस्ट, आप इससे सहमत या असहमत हो सकते है लेकिन उपेक्षा नहीं कर सकते है
आचार्य Vinay Jha ने विभिन्न
मुद्दों पर बात रखी है,
हो सकता है सब सहमत न हों, लेकिन विचारणीय तो ज़रूर है तथ्य
यहूदियों पर लिखने की इच्छा नहीं थी | कई यहूदी मेरे मित्र हैं | एक यहूदी महिला तो इजराइल से अपने खर्चे पर उडुपी (कर्नाटक) के वैदिक सम्मलेन में भाग लेने आयी थी और वहाँ मेरे समझाने पर वचन दिया कि अब कभी गोमाँस नहीं खायेंगी | वर्तमान में इजराइल भी भारत का मित्र है |
किन्तु एक प्रश्न आया था यहूदियों के बारे में, झूठ उत्तर मैं नहीं दे सकता, अतः मैंने उनके पूरे इतिहास का संक्षेप में वर्णन कर दिया |
अन्धभक्तों को पढने से मना किया था, किन्तु नहीं माने, पढ़कर अपशब्दों या निराधार आक्षेपों की बौछार करने लगे, या फिर झूठी बकवास पोस्ट करने लगे |
पहले भीमासुरों के विरुद्ध लिखा तब भी ऐसी ही उग्र प्रतिक्रया आयी | आर्यसमाजियों ने आकर बवाल किया तो उनपर भी लिखना पडा, वे भी उछल-कूद करने लगे | किसी के पास तर्क नहीं |
लेकिन ब्राह्मणों के दोष पर लिखा तो किसी ब्राह्मण ने गाली नहीं दी, और ब्राह्मण-विरोधियों को मजा आया !!
आज यहूदियों पर लिखा तो हिन्दू की खाल में यहूदी संस्कार वालों ने बड़ा उधम मचाया ! कई दर्जन को अमित्र या ब्लॉक करना पडा -- क्योकि मैंने बारम्बार कहा कि तथ्यों और तर्कों द्वारा मेरी बात काटें, गाली या झूठ या कुतर्क द्वारा नहीं | मैं ईसा मसीह का अनुयायी नहीं हूँ जो एक चांटे के जवाब में दूसरा गाल बढ़ा दूँ | मैं तो वैष्णव हूँ, किन्तु कलियुगी वैष्णव नहीं जो श्रीकृष्ण के चरित्र से नहीं सीखते, केवल रासलीला को धर्म समझते हैं | मैं तो उस विष्णु का चेला हूँ जो राक्षसों का वध करने और धर्म की संस्थापना के लिए बारम्बार अवतार लेते हैं -- विष्णु का यह मार्ग ही असली वैष्णव धर्म है | सेमेटिक (यहूदी, ईसाई, मुस्लिम, आदि, सेमेटिक लोगों में प्राचीनतम जाति अपने को "असुर" कहती थी जिनका साम्राज्य मेसोपोटामिया के आसपास दीर्घकाल तक था और इसापूर्ब 600 में समाप्त हो गया , असल में समाप्त नहीं हुआ, नाम बदल लिया) लोगों में "धर्म" नाम की कोई चीज नहीं होती, "सम्प्रदाय" होता है और उनके सारे सम्प्रदाय कट्टर, असहिष्णु और कूपमंडूकी होते हैं, संसार के इतिहास में सम्प्रदाय के नाम पर सारे कत्लेआम केवल और केवल सेमेटिक संप्रदायवादियों ने ही कराया, जिनमें सबसे पुराना बचा हुआ सम्प्रदाय यहूदी है और इनके पूर्वज अपने को "असुर" कहते थे |
रक्षा मन्त्रालय के अधीन DRDO के एक अधिकारी Ravi Sisodia जी ने मेरे पिछले पोस्ट में एक कमेन्ट में लिखा कि भारतीय सेना के लिए कानपुर की Ordnance Equipment Factory में जूते बनते हैं | उत्तर में मैंने उनको प्रमाण दिया कि उसी कारखाने का जूता इजराइल खरीदकर अपना लेबल साटकर 1997 से बेच रहा है और मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल में भारतीय सेना के लिए उसी कानपुरी जूते को मंहगे दाम पर इजराइल से आयात करने का निर्णय लिया गया है | बिना घूसखोरी के यह सम्भव नहीं है | मैंने यह उत्तर उनको दिया था :--
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आप सही कहते हैं कि कानपुर में सेना के लिए जूते बनते हैं | लेकिन आपने यह नहीं कहा कि ये भारतीय जूते विश्व से सबसे अच्छे जूते हैं जो एक सच्चाई है | इजराइल की सेना के लिए जूते बनाने वाली कम्पनी 1997 से ही कानपुर की फैक्ट्री से इजराइली सेना के लिए जूते खरीदती रही है, वह कम्पनी इस व्यवसाय में विश्व में अग्रणी मानी जाती है !! भारतीय जूते पर अपना ठप्पा मारकर पूरी दुनिया में बेचती है और नाम इजराइल का होता है | हज़ारों सालों से यहूदी ऐसे ही करामात दिखाते आये हैं | लेकिन आपको पता नहीं है कि माननीय मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल में उसी इजराइली कम्पनी से कानपुरी जूते इजराइल के ठप्पे सहित आयातित करने का सौदा हुआ ; उस कम्पनी का बयान सुन लें :--- http://bharatshakti.in/army-shoes-from-israel-made-in-india%E2%80%8B/
अब आप ही बताइये -- बिना घूस के क्या ऐसा सम्भव है ?? आपके विभाग का मामला है, अतः आप ही बता सकते हैं कि इस मामले में कितनी घूस किसको मिली होगी | लेकिन इस मामले में टांग घुसाइयेगा तो नौकरी चली जायेगी, बहुत तगड़ी माफिया है, ब्रिटिश काल से ही | वहाँ RTI भी काम नहीं देगा, रक्षा का मामला जो ठहरा !! नौसेना के एडमिरल को इस्तीफा देना पडा ! जनरल वी के सिंह का एक साल गायब हो गया, आज भी उनको रक्षा मंत्रालय से दूर रखा जा रहा है -- आप किस खेत की मूली हैं भाई साहब ? हमारे सैनिक सीमा पर खून बहाते हैं, लेकिन उनको पता नहीं है कि भारतीय सेना के असली मालिक वे लोग हैं जिन्हीने कभी युद्ध नहीं देखा, कभी बंदूकें नहीं छूईं -- IAS अफसर जो रक्षा मन्त्रालय की बड़ी कुर्सियों पर कब्जा जमाये बैठे रहते हैं | अरे भाई, IAS को रक्षा मन्त्रालय से कान पकड़कर निकाल बाहर कर दो, आतंकवाद और नक्सलवाद से लेकर पाकिस्तान और चीन तक सब सीधे हो जायेंगे |
मेरे पेज पर कुछ लिखने से पहले तथ्यों की जाँच कर लें | भारतीय सेना में संचार हेतु जो cryptography सॉफ्टवेयर प्रयुक्त होता है वह मेरे बड़े भाई साहब द्वारा बनाया हुआ था और वाजपेयी जी के कार्यकाल में स्वीकृत हुआ था -- घूस की जो रकम काट ली गयी थी वह वाजपेयी जी के कारण वापस लौटा दी गयी थी | आपलोग घूस पहले काट लेते हैं, बाँकी रकम का चेक बाद में देते हैं, सिविलियन उपक्रमों में रकम पूरी दी जाती है लेकिन घूस टेबल के नीचे से लिया जाता है ! उसके बाद से मेरे भाई साहब ने सेना के लिए कार्य करना छोड़ दिया | मेरा छोटा भाई सेना के कोर्ट मार्शल कोर्ट में जज है, पहले military intelligence में अफसर था |...
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पिछले लेख में अन्धभक्तों से मैंने आग्रह किया था कि मेरे लेख से दूर रहें | नहीं माने, गरियाने चले आये ! अब मैं आग्रह कर रहा हूँ कि आओ अन्धभक्तों, जी खोलकर मुझे गरिआओ, लेकिन खोपड़ी में थोड़ा सा भी भेजा बचा हुआ हो तो सिद्ध कर दो कि भारत सरकार के रक्षा मन्त्रालय के अधीन कारखाने का जूता इजराइल भेजकर फिर वहाँ से मंहगे मूल्य में मंगाने के पीछे घूसखोरी नहीं बल्कि कोई दूसरा कारण है !! शायद इजराइल का लेबल लग जाने से कानपुर का जूता बेहतर हो जाएगा और सेना के जवान मँहगे जूते पहनकर ठीक से युद्ध कर पायेंगे !
यह तो छोटा सा मामला है | इससे बहुत बड़ा घूसखोरी का मामला बताऊँ ? मोदी जी ने राफेल युद्धक विमान खरीदे तो सुब्रह्मण्यम स्वामी जी ने बिगड़कर घूसखोरी के आरोप लगाए थे | उनके पेज पर जाकर मैंने विरोध किया और स्वामी जी को समझाया कि भारतीय सेना को सोनिया लगभग बर्बाद कर चुकी है, राष्ट्र की रक्षा हेतु शीघ्रताशीघ्र राफेल खरीदना अनिवार्य है जिसका कारण भी मैंने बताया | एक राफेल में तीन ब्रह्मोस मिसाइल लगाए जा सकते हैं जो चीन के भीतर 2290 किलोमीटर तक जाकर भारत का हाइड्रोजन बम फेंककर वापस आ सकता है, मैंने यह प्रमाण भी दिया था कि वाजपेयी जी ने हाइड्रोजन बम का विस्फोट कराया था जिसे बिकाऊ मीडिया एटम बम कह रही है ताकि पाकिस्तान समर्थकों का हौसला बुलन्द रहे |राफेल में हाइड्रोजन बम ही वह ब्रह्मास्त्र है जिसकी बदौलत आज भारत चीन के भीतर घुसकर ललकार रहा है | मोदी सरकार ने खरीद का जो मूल्य बताया उसे सही मानकर मैंने स्वामी जी को आँकड़ें दिए कि वही विमान भारत से 33% अधिक मूल्य देकर मिस्र खरीद रहा है जिससे जाहिर है कि मोदी सरकार 33% घूस नहीं लेकर सस्ते में विमान खरीद रही है | स्वामी जी ने खेद व्यक्त करके अपने ही बयान का खण्डन कर दिया | बाद में घोषणा हुई कि 33% कम में नहीं बल्कि 67% अधिक मूल्य पर राफेल खरीदे गए थे, आरम्भ में सरकार ने झूठ बोला था | इसी कारण जनरल वी के सिंह को रक्षा मन्त्रालय से दूर रखा गया, क्योंकि उनको न तो झूठ बर्दाश्त है और न घूसखोरी |
आज जी न्यूज़ टीवी दिखा रहा है कि इजराइल से कौन कौन से रक्षा उपकरण भारत खरीद सकता है | हँसी आयी जब कश्मीर के पत्थरबाजों पर बन्दूक से रंग फेंकने वाली पिचकारी टीवी ने दिखाई ! भारत मंगलयान , हाइड्रोजन बम, ब्रह्मोस मिसाइल , आदि बना सकता है, किन्तु रंग फेंकने वाली पिचकारी इजराइल से खरीदेगा ! कानपुर में बनने वाले जूते इजराइल के यहूदी खरीदकर वापस मंहगे मूल्य पर हमें बेचते हैं तो हमारा रक्षा मन्त्रालय अपने ही कारखाने का जूता कानपुर से न खरीदकर इजराइल से क्यों मंगा रहा है ?
मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल में यह निर्णय लिया गया | मुझे अच्छी तरह मालूम है कि मनोहर पर्रिकर ने पूरे जीवन में कभी एक पैसा भी घूस खाया हो इसका कोई प्रमाण नहीं है, इस मामले में भी उन्होंने एक पैसा नहीं लिया | राफेल में भयंकर घूसखोरी हुई, किन्तु न तो मोदी जी ने घूस खाया और न ही रक्षा मन्त्री ने | परन्तु प्रधानमन्त्री और रक्षामन्त्री की ताक़त नहीं है कि रक्षा सामग्री में घूसखोरी को बन्द करा दे , क्योंकि आरम्भ से ही घूसखोरी का तन्त्र इतना जबरदस्त है कि अब किसी की मजाल नहीं है कि इसे बन्द कराये | बोफोर्स तोप में भी 3% घूसखोरी हुई थी जो क्वात्रोच्ची ने लिया था, सोनिया के प्रभाववश ऐसा हुआ था | राफेल में उससे बहुत अधिक घूसखोरी हुई है लेकिन कांग्रेस चुप है -- क्योंकि कांग्रेस जानती है कि भाजपा सरकार ने घूस नहीं खाया , और जिनलोगों ने खाया वे कांग्रेस के बनाए सिस्टम के पुर्जे हैं, उनके विरुद्ध कांग्रेस कुछ नहीं बोल सकती | घूस के बावजूद बोफोर्स बेहतरीन तोप है, राफेल भी बहुत उम्दा युद्धक विमान है, और इजराइल से आने वाला कानपुरी जूता भी विश्व का सर्वश्रेष्ठ जूता है | कई गुने अधिक मूल्य देकर भारतीय जूता इजराइल से मँगाया जा रहा है !!
अब अन्धभक्तों को मिर्ची लगेगी | इजराइल के यहूदियों ने कितना घूस किस-किस को दिया यह RTI से उपलब्ध नहीं होगा क्योंकि रक्षा के मामले में RTI बेअसर है | राफेल खरीदना तो आवश्यक भी था क्योंकि भारत के पास वैसा विमान बनाने की क्षमता नहीं है | हम चाहें तो बना सकते हैं, लेकिन बनायेंगे नहीं (2011 ईस्वी में ही राफेल की फैक्ट्री भारत में लगाने के लिए फ्रांस तैयार हो गया था किन्तु इसके लिए भारत सरकार के कारखाने HAL में जो सुधार करने पड़ेंगे उसका आरम्भ करने का निर्णय भी आजतक नहीं लिया गया है -- भारत में ही राफेल बनेंगे तो कमीशन कैसे खायेंगे?)| तेजस विमान परियोजना को रोक-रोक कर कई दशक तक घसीटा गया, जब-जब भाजपा सरकार आयी तब-तब उस परियोजना में तेजी आयी वरना तेजस कभी बन ही नहीं पाता ! लेकिन किसी युद्धक विमान को बनाने में आप 30 वर्ष लगा देंगे तो जब वह परियोजना पूरी होगी तबतक उसकी तकनीक पुरानी पड़ जायेगी ! यही कारण है कि जबतक हम तेजस बना पाते तबतक राफेल खरीदने के लिए हम विवश हो गए | जनवरी 2012 में ही भारतीय वायुसेना के विशेषज्ञों ने राफेल को सबसे उपयुक्त विमान घोषित कर दिया था, किन्तु सोनिया ने चुपचाप खरीद रुकवा दी ताकि भारत को कमजोर किया जा सके | इसपर मैं बहुत विस्तार से पहले लिख चुका हूँ |
यह घूसखोरी सेना में भी है | जनरल वी के सिंह को इसी कारण हटना पड़ा था | भारत की रक्षा नीति सेना के अधिकारी नहीं बनाते, IAS अफसर बनाते हैं, यह बात एक सेवानिवृत मेजर-जनरल ने जी-न्यूज़ टीवी पर बताया था | इन IAS अफसरों ने कभी बन्दूक छूआ भी नहीं | लेकिन हर विभाग में सारे अन्तिम निर्णय वे ही लेंगे, सरकार को केवल मुहर लगाने का भार है | मोदी जी केवल भाषण दे सकते हैं और IAS लॉबी के निर्णयों पर ठप्पा लगा सकते हैं -- इसी का नाम है "भारत सरकार" !
हँसी आती है जब मोदी सरकार के तीन वर्षों से अधिक बीतने पर भी JNU के वामपन्थियों के विरुद्ध अन्धभक्तों की फ़ौज फेसबुक पर हंगामा मचाती है -- यह कोई नहीं पूछता कि तीन वर्षों के दौरान तीन सौ से अधिक नयी बहालियाँ JNU में शिक्षक पद पर हुई उसमें एक भी राष्ट्रवादी क्यों नहीं है, सब के सब नए शिक्षक वामपन्थी या कांग्रेसी ही क्यों हैं ? इसका कारण यह है कि RSS ने कभी देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारना अपना लक्ष्य नहीं माना, केवल सरस्वती शिशु मन्दिर खोलकर सन्तुष्ट रहे | उच्च शिक्षा को सुधारने के लिए तो आंशिक प्रयास भी नहीं किया | जब राष्ट्रवादी बुद्धिजीवी निर्माण करने का आप प्रयास ही नहीं करेंगे तो JNU जैसी संस्थाओं से निकलने वाले लोग ही प्रोफेसर और IAS अफसर बनेंगे | मैकॉले की शिक्षा प्रणाली को ये राष्ट्रवादी संघी लोग गरियाते तो बहुत हैं, किन्तु स्वतन्त्रता के बाद से आजतक कुल ग्यारह वर्षों तक देश की सर्वोच्च सत्ता RSS के हाथों में रही है -- शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु क्या किया यह तो कोई बता दे ?
मुझे ग्यारह दिनों के लिए ही सर्वोच्च सत्ता सौंप दो (मुझे सत्ता नहीं चाहिए, केवल उदाहरण दे रहा हूँ) तो सारे प्रोफेसरों और अफसरों की दोबारा परीक्षा लेकर सबको नौकरी से बर्खास्त करा दूंगा, केवल ईमानदारों को बख्शूंगा, अच्छे बुद्धिजीवी कहाँ और कैसे मिलेंगे यह मैं जानता हूँ | देश में मेधावी और ईमानदार लोगों की कमी नहीं है | अमरीका से दोगुना वेतन देकर (भ्रष्टाचार बन्द हो तो पैसे की कमी नहीं रहेगी) भारतीय वैज्ञानिकों को भारत बुला लूँगा, उनमें से अधिकाँश को भारत से प्रेम है, विवश होकर अमरीका गए हैं -- अमरीका एक ही रात में टांय-टांय फिस्स हो जाएगा | वहाँ के अधिकाँश ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी से निकलकर शोधकार्य नहीं करते, बेरोजगारी भत्ता लेकर बैंकाक में मालिश कराते हैं, लॉस वेगास की अपेक्षा बैंकाक सस्ता पड़ता है | अमरीका के 80% शोधकर्ता भारतीय और चीनी हैं | अमरीका में 99% शोध परियोजनाओं के प्रमुख यहूदी और ईसाई होते हैं जबकि उन परियोजनाओं का वास्तविक शोधकार्य करने वाले 80% लोग हिन्दू और चीनी हैं , परन्तु मान्यता और पुरस्कार प्रमुख को मिलता है | अभी भी भारत सॉफ्टवेयर में महाशक्ति है, अमरीका से भारतीय वैज्ञानिक यदि भारत लौट आयें तो पूरी दुनिया एक ही रात में भारत के आगे घुटने टेक देगी -- हमें केवल यह गारण्टी देनी होगी कि भारत में उनको शोध हेतु अवसर और जीने की अच्छी सुविधा मिलेगी | मुद्रा की क्रयशक्ति को आधार बनाएं तो भारत के प्रोफेसर आज संसार में सबसे अधिक वेतन पा रहे हैं (रूपये की क्रयशक्ति घरेलू बाज़ार में डॉलर की तुलना में 17 गुनी कम है, अर्थात एक डॉलर जितना सामान खरीद सकता है उतना आप 17 रुपये में खरीद सकते हैं, लेकिन यहूदियों के बैंकों ने रुपये को चार गुना सस्ता बनाकर भारत की भयंकर लूट आज भी जारी रखी है, एक भारतीय प्रोफ़ेसर इस हिसाब से वार्षिक सवा लाख डॉलर पाता है जो अमरीकी प्रोफ़ेसर से बहुत अधिक है) , और एकाध अपवादों को छोड़कर कोई भारतीय प्रोफेसर कुछ नहीं करता, उनमें से बहुत तो केवल हिन्दुत्व के विरुद्ध वातावरण बनाने में ही व्यस्त रहते हैं | और भी बहुत कुछ सम्भव है ग्यारह दिनों में | जारशाही को जड़ से उखाड़कर फेंकने में केवल दस दिन लगे थे | ग्यारह वर्षों में RSS भ्रष्ट तन्त्र का एक बाल तक नहीं उखाड़ पायी -- क्योंकि RSS के एजेंडा में ही यह नहीं है | RSS तो 92 वर्ष की बूढ़ी है, 11 वर्षों तक सत्ता में रही है !! भूकम्प में खिचड़ी बांटती है, चीन से युद्ध में स्वयंसेवकों ने कार्य किया, और भी बहुत से अच्छे कार्य RSS करती है | लेकिन जैसे हाथी को अपना देह नहीं सूझता, वैसे ही RSS अपनी ताक़त का सही प्रयोग नहीं जानती | क्योंकि उसकी मौलिक प्रशिक्षण में ही दोष है, जिस कारण मैं RSS से दूर रहकर ही उसका समर्थन करता रहा हूँ | उसे सनातन धर्म के मूल ग्रन्थों पर विश्वास नहीं है, सन्ध्यावन्दन के समय लाठी भांजते हैं, एकात्म मानववादी राष्ट्रवाद को कैसे लागू किया जाय इससे पहले "राष्ट्र" किसे कहते हैं इसकी समझ साफ़ करनी पड़ेगी | राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, सीमा से तो देश बनता है, राष्ट्र नहीं | राष्ट्र की पहचान पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने अच्छी तरह कराई थी | RSS की नेतृत्व मण्डली में बहुत से श्रेष्ठ लोग हैं जो यह सब जानते हैं और करने में सक्षम भी हैं | लेकिन कुछ करते नहीं !! क्योंकि RSS के दर्शन में मौलिक सुधार की आवश्यकता है, सनातन धर्म के मौलिक शास्त्र से RSS के दर्शन का तालमेल बिठाने की आवश्यकता है, वरना हिन्दू राष्ट्र केवल लफ्फाजी बनकर रह जाएगा, लेकिन यह तालमेल कोई नहीं बिठा सकता | अब तो RSS में भीमासुरों का भी दबदबा बढ़ने लगा है, भविष्य तो और भी बुरा है |
मैंने कई दशकों तक प्राचीन भाषाओं के भाषाविज्ञान पर शोधकार्य किया है | अन्त में मैंने यही पाया कि यहूदियों के कारण ऐतिहासिक भाषाविज्ञान में शोधकार्य एक सीमा के आगे बढ़ नहीं पाया, केवल भारत से यूरोप तक की भाषाओं को यूरोप से आया हुआ बताकर शोध बन्द कर दिया गया, हिब्रू और अरबी से संस्कृत, ग्रीक आदि के घनिष्ठ सम्बन्ध हैं यह सारे भाषावैज्ञानिक मानते हैं, लेकिन यहूदियों के भय से कोई कुछ नहीं करता | पश्चिम के विषविद्यालयों पर यहूदियों का दबदबा है, अरब शेखों का नहीं | अतः सेमेटिक भाषाओं की आर्य उत्पत्ति सिद्ध होने पर अरब शेख बुरा मानेंगे इसका भय नहीं है, अमरीका के सत्ताधारी यहूदी सेठ भड़केंगे जिनके लोग हर जगह भरे पड़े हैं |
ईस्ट इण्डिया कम्पनी के मालिकों में से कितना शेयर यहूदियों के पास था इसका पता लगाएं, तब यह भी पता चलेगा कि RSS, जनसंघ और भाजपा ने स्वतन्त्रता संग्राम से दूरी क्यों बनायी, स्वतन्त्रता सेनानियों को टिकट तक नहीं दिया और लफंगों को उनके विरुद्ध जिताने में सारा जोर लगाया, और यहूदियों के प्रति विशेष स्नेह क्यों रखा |
मैं सनातन धर्मशास्त्र को प्रमाण मानता हूँ, किसी आधुनिक संगठन या विचार को नहीं | आज की परिस्थिति में मोदी जैसा प्रधानमन्त्री सम्भव नहीं है, किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि महादेव का अपमान करने वाला "हर हर मोदी" जैसा हिन्दू-विरोधी नारा लगाया जाय, जैसा कि अन्धभक्त लगाते हैं | आज की परिस्थिति में RSS से बेहतर राष्ट्रवादी संगठन कोई और नहीं है, किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि सन्ध्यावन्दन छोड़कर लाठी भाँजने से 'हिन्दू राष्ट्र' बन जाएगा | 'हिन्दू राष्ट्र' को त्रेतायुग में एक धोबी ने ध्वस्त कर दिया, आज तो कदम-कदम पर उसी धोबी के गधे भरे पड़े हैं |
अन्धभक्तों को मिर्ची लगेगी तो गरियायेंगे और उनको ब्लॉक करने का मुझे सुअवसर मिलेगा | इजराइल से पिचकारी-गन और अमरीका से पेलेट-गन में क्यों इस गरीब देश का पैसा बर्बाद करते हो, कश्मीर के पत्थरबाजों के लिए पत्थर से बांधकर मिर्ची पाउडर का छोटा सा पैकेट ही काफी है, सबसे सस्ती पड़ेगी | अन्धभक्तों को थोड़ी सी मिर्ची अपनी आँखों में भी डाल लेनी चाहिए, कुछ काल तक कष्ट तो होगा लेकिन आँख खोलना सीख जायेंगे |
इजराइल का कोई व्यक्ति मेरा हिन्दी लेख पढ़ने नहीं आयेगा, अतः मेरे लेख से इजराइल और भारत की मैत्री पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला, इस लेख का उद्देश्य अंधभक्तों की पहचान करना है ताकि ब्लॉक कर सकूँ | मेरी "कुछ बातें" गलत हैं तो तर्क सहित खण्डन करने से किसने रोका था ? सीधे फतवा सुनाने वाले मुल्लों को मैं ब्लॉक करता हूँ | मुल्ले दो किस्म के होते हैं -- कटुए और बिन-कटुए | कटुओं को पहचानना आसान है | बिन-कटुए तो घर के भेदी और अन्धभक्त हैं, अधिक खतरनाक हैं, कब किस गोल में गेन्द डाल देंगे इसका कोई भरोसा नहीं !
असली "हिन्दू राष्ट्र" कैसे बन सकता है यह मेरे लेखों का मूल उद्देश्य है | किन्तु पहले "सेक्यूलर घर के भेदियों" और "छद्म-हिन्दू अन्धभक्तों" को बेनकाब करना आवश्यक है, क्योंकि मलबा हटाने के बाद ही नवनिर्माण सम्भव है |
यहूदी संसार में एकमात्र समुदाय है जिनके धर्मग्रन्थ में स्पष्ट आदेश है कि अपने सम्प्रदाय के लोगों से सूद न लें किन्तु अन्य सम्प्रदाय वालों से सूद लें | निवेश पर सूद की धारणा से ही बैंकिंग व्यवस्था और पूँजीवाद की उत्पत्ति हुई (यह लेख ध्यान से पढ़ें, यहूदियों ने संसार में कौन कौन से गुल आज भी खिला रखे हैं इसका खुलासा है और यह भी उल्लेख है कि अमरीका के केन्द्रीय बैंक एवं स्टॉक बाज़ार पर यहूदियों का पूर्ण नियंत्रण है --- https://realcurrencies.wordpress.com/2014/06/05/capitalism-is-jewish-usury/)| इस वेबसाइट में कहा गया है कि 1850 ईस्वी में रोथ्सचाइल्ड की पूँजी 50 अरब डॉलर थी जो 5% वृद्धि की दर पर अब एक हज़ार अरब डॉलर होनी चाहिए -- बिल गेट्स की पूँजी से सोलह गुनी अधिक ! रोथ्सचाइल्ड की आज कितनी पूँजी है यह कोई नहीं जानता क्योंकि किसी सरकार की मजाल नहीं है कि उसका बहीखाता जांचे और किसी मीडिया की हिम्मत नहीं है कि उसे पूँजीपति कहे ! इतिहासकारों की हिम्मत नहीं है कि उसे ईस्ट इंडिया कंपनी का मालिक कहे | उन्नीसवीं शती में भी यूरोप की सभी सरकारों को यह घराना सूद पर कर्ज देता था और युद्धरत देशों के दोनों पक्षों की कर्ज देकर सहायता करता था | आज भी अमरीका में बैठकर ये लोग भारत और पाकिस्तान दोनों को हथियार बेचते हैं लेकिन अपना नाम जाहिर नहीं करते | संसार के सभी बैंकों पर इन लोगों का कब्जा है | इस वेबलेख में यहूदी धर्मग्रन्थ को उद्धृत किया गया है कि उनके सर्वोच्च देवता यहवह (यहोवा) का आदेश है कि यहूदियों को सूदखोरी द्वारा पूरे संसार का दिग्विजय करना है :-- YHVH emphatically orders the Jews several times to conquer the world with Usury in Deutoronomy, for instance: “15:6 For the LORD thy God blesseth thee, as he promised thee: and thou shalt lend unto many nations, but thou shalt not borrow; and thou shalt reign over many nations, but they shall not reign over thee.”
अब बताइये, अल्लाह ने कहा कि तलवार के बलपर दुनिया को जीतो और उनके धर्मभाई यहवह ने कहा कि सूदखोरी द्वारा दूसरे लोगों को गुलाम बनाओ !! यह भी कोई धर्म हुआ ??? छद्म-हिन्दू अन्धभक्तों को लगता है कि यहूदी भारत का बड़ा उपकार करेंगे तो उन्हें मनमोहन सिंह के चरण छूने चाहिए जिन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड में कहा था कि ब्रिटिश राज, अर्थात यहूदी रोथ्सचाइल्ड की ईस्ट इंडिया कम्पनी का राज, भारत के लिए कल्याणकारी था ! मनमोहन सिंह की पार्टी तब क्यों दावा करती है कि चरखा दिखाकर उनलोगों ने अंग्रेजों को भगा दिया ? कांग्रेस से बेहतर तो RSS है जिसने चरखा भी नहीं दिखाया, स्वतन्त्रता संग्राम में बिना भाग लिए ही अंग्रेजो को भगा दिया और राष्ट्रवाद के सबसे बड़े महन्थ बन बैठे -- न कभी सन्ध्यावन्दन किया, न कोई यज्ञ, न किसी हिन्दू धर्मशास्त्र में आस्था है, और न रामजन्मभूमिमंदिर के निर्माण में , लेकिन सबसे बड़े हिन्दुत्ववादी हैं !
किन्तु इतना जोड़ दूँ कि विकल्प खतरनाक हैं, अतः देश की जो परिस्थिति है उसे देखते हुए भाजपा की सरकार आवश्यक है | कम से कम अपने को हिन्दू तो कहते हैं !
आज इजराइल हमारा मित्र है | जिस दिन हम रूपये की असली क्रयशक्ति स्थापित करा देंगे (बहुत आसान है, केवल अमरीका विरोधी सरकार चाहिए जो ब्राज़ील, रूस, चीन, आदि से वस्तु विनिमय को बढ़ावा दे जिसका निर्णय BARC ने पहले से कर रखा है किन्तु अमरीका से घूस खाने वाले नेता ऐसा होने नहीं देते), जिस दिन हम आत्मनिर्भर बनने को प्राथमिकता देंगे, उस दिन दुनिया के यहूदी हमारे शत्रु बन जायेंगे क्योंकि वैश्विक पूँजीवाद पर यहूदियों का ही कब्जा है |