लोग कहते है इस देश में असहिषुणता है बोलने और लिखने की आज़ादी नहीं है , तन्मय भट्ट जैसा दो कौड़ी का आदमी भारत रत्न लता मंगेशकरजी के लिए अभद्र वाहियात निकृष्ट अक्षम्य भाषा का प्रयोग करता है और देश के सूडो सेक्युलर नेता,पत्रकार,सामाजिक कार्यकर्ता चुप्पी साधे रहते है इन्हे तो छोडिए देश की जनता जो लताजी को सुन सुन कर बड़ी हुयी है नींद नहीं आने पर लताजी के गाने सुनकर सोये है, बैचेन होने पर लताजी के गाने सुनकर मन को शांत किया है चुप्पी साधे रहती है, मजाल है कोई कुछ बोल दे और किसी की शारीरिक बनावट का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए क्यूंकि उन्हें ईश्वर ने रचा है पर खेद के साथ लिखना पढ़ रहा है कि तन्मय भट्ट जरा अपनी शारीरिक बनावट पर कभी ध्यान दिया है तुमसे अच्छी बनावट तो गेंडे सूअर की होती है आईने मेखुद को देख लिया होता तो कभी सपने में भी देश की आन बान शान लता दीदी का मजाक नहीं बना पाते पर तुम तो मोटी चमड़ी के हो मुझे खेद तो इन देश के सूडो सेक्युलर नेता,पत्रकार,सामाजिक कार्यकर्ता की चुप्पी पर है, कुछ लोगो का कहना है कि तन्मय भट्ट जैसे गेंडे (गेंडे से माफ़ी सहित ) की सार्वजनिक भर्तस्ना नहीं की गयी तो इसके जैसे अभद्र लोगो को बढ़ावा ही मिलेगा
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