Saturday, 16 April 2016

अशोकनगर जिले में मेरे गांव में जबसे इस वर्ष गेहूं और चना की फसल के लिए बोर कर पानी देना शुरू किया उसके बाद पिछले ३ माह से गांव के भीतर के सारे कुएं और हैंडपंप जलस्तर कम होने की वजह से सुख गए है और यह पिछले ५० वर्षो में पहली बार हुआ है, पर हम एक गांव की ही क्यों बात करें बुंदेलखंड के अधिकतर गांवों,कस्बों और शहरो में यही हालात है और अकेले बुंदेलखंड की ही क्यों बात करें पुरे भारत देश में ९ राज्य सूखे से प्रभावित है, महाराष्ट्र के हालात तो सबके सामने है वहां तो पानी के टेंकर लूटे जा रहे है और कई स्थानों पर १४४ धारा लगनी पड़ी है, पुरे विश्व में दिन और रात के तापमान में वृद्धि हो चुकी है इतना ही नहीं वर्ष में गर्म दिनों की संख्या में भी इजाफा हुआ है दूसरी तरफ जापान में भूकम्प आ गया है और सुनामी के खतरे के संकेत हो चुके है, कुछ दिनों पहले इंग्लैंड के कुछ शहरो में इतनी बारिश हुयी कि सड़कों पर कई फ़ीट पानी भर गया, ये सब हमे यही संकेत दे रहे है कि मनुष्य ने प्रकृति के साथ इतना खिलवाड़ कर दिया है कि प्राकर्तिक असतुंलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है और वह दिन दूर नहीं जब हम पानी,अनाज और दलहनों के लिए तरस रहे होंगे और प्रकृति इन्हे देने से हमे मना कर देगी अभी भी वक्त है आइये हम प्रकृति को बचाने के लिए शपथ ले और हाथ से हाथ मिलाकर इस अभियान में जुट जाये अन्यथा ?????

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