Wednesday, 30 March 2016

पिछले २-३ दिन से प्रवचन देने का ट्रेंड सोशल मीडिया (फेसबुक,ट्वीटर ) पर चल रहा है और प्रवचनकारी संत लोग कोई और नहीं खाजदीप सरदेसाई,पागरिका घोष,बुरखा दत्त, राहुल संवल ,खबीश कुमार और पाप प्रसन्न बाजपेयी जैसे बुद्धिजीवी महापुरुष है जो डॉ पंकज नारंग की हत्या के मामले को साम्प्रदायिक रंग नहीं देने का प्रवचन दे रहे है और पुलिस से भड़काऊ खबरों पर कार्यवाही के लिए निवेदन कर रहे है,बिलकुल सही बात है कि देश में लोगो के बीच वैमनसयता, तनाव नहीं बढ़ना चाहिए पर ये तो देखो कि प्रवचनकर्ता है कौन,वही लोग जिन पर नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली की कहावत पूरी तरह फिट बैठती है,भैय्ये आप लोगो के ये ख़याल तब कहाँ गए थे जब दादरी और हैदराबाद की घटनाओं को आपने साम्प्रदायिक और जातिवादी रंग देकर देश को तोड़ने की कोशिश की थी,लोगो को आपस में लड़ाने की कोशिश की थी तब क्या आपकी बुद्धि घास चरने गई थी तो आज क्यों बिलबिला रहे हो और लोग जिसकी मांग कर रहे है वह है गैरक़ानूनी रूप से रह रहे लोगो पर कार्यवाही की तो आपके पेट में दर्द क्यों हो रहा है. यही सब देखकर तो लगता है कि आप लोगो की नीयत में खोट है वर्ना देश में सदभाव रहे लोग आपस में मिलजुल कर रहे ऐसा कौन नहीं चाहता.जयहिन्द

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