Tuesday, 8 March 2016

हमें तो धन्यवाद देना चाहिए कन्हैया,उमर खालिद,अनिर्बान जैसे छात्रों को जिन्होंने ९ फ़रवरी को देशद्रोही कार्यक्रम आयोजित किया जिसकी वजह से हिंदुस्तान के करोड़ो लोगो को जे एन यू के वास्तविक स्वरुप से परिचय का मौका तो मिला, ये तो पता चला कि ये छात्र जो बोल रहे है उसकी जड़ कहाँ है नही तो ये कभी पता ही नही चलता कि आनंद कुमार,निवेदिता मेनन, कमल ए मित्रा चेनॉय जैसे ६०९ प्रोफेसर वहा पर पढ़ाते है और क्या खूब पढ़ाते है कि कश्मीर,नागालैंड,मणिपुर में भारत देश ने सेना के दम पर बलपूर्वक अवैध कब्जा कर रखा है,सेना वहा पर अत्याचार करती है और हिन्दू धर्म सबसे हिंसात्मक( violent ) धर्म है, बात तो सही है आइसिस,तालिबान,अल कायदा,लश्करे ताइबा,हिज्बुल मुजाहिदीन हिन्दू धर्म अनुयायियों ने ही तो खड़े किये है, ये सब प्रोफेसर्स वर्षो से न्यूज़ चैनल्स पर विशेषज्ञों के रूप में हमे और हमारे देश को कोसते रहे है और हम इन्हे ज्ञानी समझते रहे , पर ये सब ज्ञानी तो है पर जहर शास्त्र के क्यूंकि ये पिछले ४५-४६ वर्षो से छात्रों के मन में देश के प्रति और हिन्दू धर्म के प्रति जहर ही तो भरते रहे है और इनकी शिक्षा प्राप्त कर कई छात्र आज छत्तीसगढ़,झारखण्ड,आंध्र प्रदेश,तेलंगाना,ओड़िसा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में नक्सलवाद की बागडोर संभाले हुए है और देश के भीतर आतंकवाद का पर्याय बन गए है, इनकी शिक्षा प्राप्त कर बहुत सारे पत्रकार हो गए जैसे राजदीप,बरखा दत्त,सागरिका घोष,शेखर गुप्ता,प्रणव रॉय, अभिसार,अभिज्ञान और अब इनके पढ़ाये हुए छात्र खुलकर देशद्रोह का समर्थन कर रहे है देश को टुकड़े टुकड़े करने की बात कर रहे है सेना को गाली दे रहे है, और यही सब पत्रकार इन छात्रों को क्रांतिवीर की उपाधि से नवाज़ रहे है, सही बात है बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए,ये तो देशद्रोही विचारधारा के काँटे ही चुभोयेंगे और मै पुन: कन्हैया,उमर खालिद और अनिर्बान जैसे छात्रों (अब अगर पैतीस वर्ष की आयु में भी छात्र कह सकते हो तो ) का तहेदिल से आभारी हूँ कि इनकी वजह से पूरे देश को जे एन यू की सच्चाई तो पता चली जय हिन्द    

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