मार्च के महीने
में जो असामयिक
ओलो के साथ
बारिश हो रही
है उसने एक
बार फिर देश
के कई क्षेत्रो
में खास तौर
पर बुंदेलखंड के
क्षेत्र में गेहू
और चने की
फसल बर्बाद कर
दी है और
किसानो के चेहरे
पर उदासी ला
दी है, आज
किसान फिर रो
रहा है ,कभी
हमने सोचा है
कि खेती एक
दम जुए की
तरह है किसान
को सबसे पहले
बोनी के लिए
पानी चाहिए फिर
बार बार सिचाई
करता है उसके
लिए पानी चाहिए
अगर फसल बड़ी
होने लगे और
कही तेज ठण्ड
पड़ जाये तो
फसलो को पाला
लग जाता है,अगर फसल
पक भी जाये
और पानी गिर
जाये तो भी
फसल ख़राब हो
जाती है,साथ
में ओले गिर
जाये तो पूरी
फसल चौपट हो
जाती है अगर
फसल कट कर
खलियानों में रखी
हो और पानी
गिर जाये तो
भी फसल बर्बाद
हो जाती है
और अगर किसान
फसल को काटकर
मंडी ले जाये
और पानी गिर
जाये तो भी
अनाज ख़राब हो
जाता है पिछले
चार वर्षो से
किसान खास तौर
पर बुंदेलखंड का
किसान बहुत निराश
है और बुंदेलखंड
क्षेत्र में मायूसी
और बेबसी में
किसानो के द्वारा
आत्महत्या करने की
प्रवत्ति बढ़ चुकी
है,लेकिन ये
कोई भी समझने
की कोशिश नही
कर रहा है
कि प्रकृति क्यों
इतना खिलवाड़ कर
रही है क्यों
हम प्रकृति में
हो रहे बदलाव
को नही समझ
पा रहे है,
जमीन के भीतर
पानी का स्तर
सैकड़ो फुट नीचे
चला गया है
और इस समय
तो प्रदेश के
अधिकांश हिस्सों में कुओं
और हैंडपंप में
पानी ही नही
बचा है ये
सूख चुके है
,सिर्फ हमारे देश में
ही नही पूरे
विश्व में विषम
परिस्थितिया उत्पन्न हो रही
है,कही सूखा
है तो कही
बाढ़ की स्थिति
है ऐसा क्यों
हो रहा है
क्या हमने जानने
का प्रयास किया
है और अगर
अभी भी हम
नही संभलेंगे तो
ऐसी परिस्थितिया पैदा
होगी जिन्हे कोई
नही संभाल पायेगा
इसलिए अभी भी
समय है जाग
जाओ वर्ना ??????????????
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