Wednesday, 17 February 2016

सच में बड़ा दुःख होता जब किसी को अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम देश को ख़त्म करने,देश के टुकड़े करने की बात करते देखता हूँ और उससे भी ज्यादा दुःख तब होता है जब संवेधानिक पदो पर बैठे लोग अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओ का समर्थन करते है , प्रधानमंत्री को पत्र लिखते है , राष्ट्रपतिजी से गुहार लगाते है , क्या कीजियेगा ऐसे संवेदनहीन और देशके प्रति भावनाहीन लोगो का , सच्चाई तो यह है कि आज़ाद और लोकतान्त्रिक देश में है अगर कही और होते तो इनकी दुर्दशा तय थी

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