जे एन यू( जवाहर लाल यूनिवर्सिटी ) बनी क्यों थी ये बनी थी जिससे छात्र हमारे देश के इतिहास का अध्ययन करसके, इतिहास के सभी पहलु सामनेआ सके इसीलिए जे एन यू में छात्रों को ११ रूपये महीने पर हॉस्टल , १०९ रूपये छे माही फीस , सब्सिडी पर खाना और ५०,००० रूपये तक की छात्रव्रती , लेकिन जे एन यू के हॉस्टल में प्रवेश लेना है तो किसी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता या कम्युनिस्ट छात्र संग़ठन के पदाधिकारी का सिफारिशी पत्र लगता है,फिर करते रहो अंडर ग्रेजुएट , पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स, पी एच डी , यू पी एस सी की तैयारी, पड़े रहो १५-१५ साल तक और ये सब किसके पैसे से , हम जैसे टैक्स देने वालो के पैसे से और बदले में देश को क्या दे रहे है। एक अफज़ल मरोगे १०० अफज़ल पैदा करेंगे,कश्मीर की आज़ादी लेकर रहेंगे,केरल को आज़ाद कर केरहेंगे,असम को आज़ाद कर के रहेंगे, पाकिस्तान जिंदाबाद , गो बेक गो इंडिया तेरी (भारत देश की )बर्बादी तक संघर्ष करेंगे , और जे एन यू के केम्पस में क्या नही मिलता है सब मिलता है जैसे ड्रग्स, शराब और भी सब कुछ। पर देश को और देशवासियो को क्या मिल रहा है देशद्रोह और देशद्रोही मानसिकता के युवा , सिर्फ छात्र ही ऐसे हो ऐसा नही है जे एन यू के शिक्षक भी वैसे ही है देशद्रोही मानसिकता वाले इसीलिए तो अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर खुलकर इन देशद्रोहियो का समर्थन करते है, सोचिये क्या ऐसा जे एन यू ( यूनिवर्सिटी,कॉलेज, शिक्षक और छात्र ) हमें चाहिए। सोचिये जरूर। जय हिन्द
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