कल मैंने लिखा था कि कल रात ट्राईकलर फॉर यूनिटी कार्यक्रम को देख अर्णव गोस्वामी के प्रति मेरे मन में सम्मान बढ़ गया, उसकी वजह थी कि जब बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट की वकील सुश्री शबनम ने कहा कि सरकार का सभी केंद्रीय विश्वविधालयो में तिरंगा फहराना अनिवार्य करना एक राजनितिक और सांप्रदायिक कदम है तब अर्णव ने स्पष्ट रूप से जोर देते हुए कहा कि तिरंगा फहराने का निर्णय एक दम उचित है और देखते है कि तिरंगे के नीचे कैसे लोग देशविरोधी नारे लगाते है और जब सुप्रीम कोर्ट की वकील सुश्री शबनम की शर्मनाक दलीले सुनकर मेजर जनरल जी डी बख्शी की आँखों में आंसू आ गए और उन्होंने कहा कि क्या देशभक्ति का ठेका सिर्फ फ़ौज वालो ने ले रखा है तो अर्णव ने कहा कि करोड़ो देशवासी उनके साथ है और राष्ट्रभक्ति में वो अकेले नही है और तभी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का फोन आता है और वो कहती है कि वो बख्शी साब से एक मंत्री नहीं एक भारतीय होने के नाते बात कर रही है और स्मृति ईरानी ने बख्शी साब से कहा कि आप और आप जैसे फौजी राष्ट्रभक्ति में अकेले नही है उनके जैसे भारतीय भी उनके साथ है तो सच कहूँ उस कार्यक्रम में जो तथाकथित धर्मनिरपेक्षी बैठे थे उनके मुह ऐसे हो गए थे जैसे उनकी सार्वजनिक धुलाई हो गयी हो, एक अदभुत कार्यक्रम था और अंत में यही कहूँगा कि सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में 207 फुट ऊँचा तिरंगा फहराने का निर्णय एक "मास्टर स्ट्रोक" ही कहा जाएगा.
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