हरियाणा के जाटो ने आरक्षण के नाम पर जो तांडव पूरे राज्य में किया है वह शर्मनाक है, क्या अपनी मांगो को मनवाने के लिए हम राष्ट्रद्रोही हो जाये, क्या दुकानो,स्कूलों,अस्पतालों,शॉपिंग मॉल ,गाड़ियों में आग लगाना उन्हें नष्ट करना राष्ट्रद्रोह नही है ? क्या लड़कियों के हॉस्टल में घुस कर बदतमीजी करना राष्ट्रद्रोह से कम है ? क्या शॉपिंग मॉल और दुकानो से सामान लूट कर ले जाना राष्ट्रद्रोह से कम है ? क्या रेल की पटरियां उखाड़ना रेल रोकना राष्ट्रद्रोह नही है ? क्या नहर जो पूरे दिल्ली को पानी सप्लाई करती है में तोड़फोड़ करना राष्ट्रद्रोह नही है ? क्या जाट दुसरो को अपनी जाति बताने में गर्व महसूस करेंगे ? जी नही क्यूंकि अपने हक की लड़ाई लड़ना एक बात है और लूटपाट करना,तोड़फोड़ करना, आग लगाना ये अपनी मांगे मनवाने का तरीका हो ही नही सकता, क्या अब हरियाणा में दूसरी जाति वालो के साथ जाटो के सम्बन्ध कभी भी सामान्य हो पाएंगे ? जी नही अब एक खाई इनके कृत्यों ने पैदा कर दी है जिसका भर पाना संभव नही दिखता और वो लोग जिन्होंने इस घिनोने आंदोलन का षड्यंत्र रचा है उनके चेहरे सामने लाना हरियाणा राज्य सरकार का दायित्व है और उन्हें कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए
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