आजकल हिन्दू धर्म के रीति रिवाजो या नियम कायदो में बदलाव के लिए बहुत बहस चल रही है और स्वस्थ तरीके से बहस होना भी चाहिए, पर हिन्दू धर्म को ध्यान से समझने की कोशिश की जाए तो यह स्पष्ट समझ में आता है कि सिर्फ कुछ मंदिरो को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर मंदिरो में किसी के भी प्रवेश पर कोई पाबंदी नही है, हिन्दू धर्म में तो महिलाये भी महामंडलेश्वर और अन्य उपाधियों से सुशोभित होती है, सिर्फ हिन्दू धर्म में ही नारी को शक्ति का स्वरुप माना गया है और हम सभी माँ के कई स्वरूपों जैसे माँ दुर्गा,माँ काली,माँ वैष्णोदेवी,माँ शारदा , माँ सरस्वती,माँ लक्ष्मी और ना जाने किन किन स्वरूपों में आदिशक्ति की पूजा अर्चना करते है और तो और हिन्दू धर्म ही है जहाँ सीताराम, राधेश्याम, लक्ष्मीनारायण, गौरी महादेव इत्यादि बोलते है अर्थात भगवन के पहले माँ का नाम लिया जाता है, यह भी सत्य है कि अभी भी हिन्दू धर्म में कई रीति रिवाज या कुरीतिया चल रहे है जिनमे बदलाव की आवश्यकता है पर हिन्दू समय समय पर इनमे बदलाव करते रहे है और उम्मीद करता हूँ कि हम सभी जाति प्रथा और भेदभाव से ऊपर उठेंगे और हिंदुस्तानी संस्कृति को एक नया परिष्कृत स्वरुप प्रदान कर पाएंगे जय माता दी
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